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'क़ानूनी दायरे से बाहर कार्रवाई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने कथित आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त सैकड़ों संदिग्ध लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी दायरे से बाहर रहकर कार्रवाई की है. संगठन का कहना है कि पाकिस्तान ने ऐसे सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया और है इनमें से कुछ लोगों को यातनाएँ दी गईं और कुछ के साथ बुरा बर्ताव हुआ. संगठन का आरोप है कि इनमें से कुछ लोगों को अमरीका के हवाले कर दिया गया और कई अन्य लापता हैं और उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है. ऐमनेस्टी के अनुसार ग़ुमशुदा लोगों में कुछ लोगों पर अल क़ायदा का सदस्य होने का शक था लेकिन उनके अलावा इन लोगों में कुछ बच्चे भी शामिल थे. संगठन की रिपोर्ट ऐसे वक्त में आई है जब पाकिस्तान के राष्ट्रपति ब्रिटेन में हैं. संगठन की यह रिपोर्ट क्यूबा स्थित ग्वांतानामो बे की अमरीकी जेल में क़ैद रहे लोगों से बातचीत पर आधारित है. इसके अलावा ऐसे परिवारों से भी संपर्क किया गया है जिनके घरों के लोग लापता हैं. चिंता रिपोर्ट के मुताबिक हिरासत के मामलों के गुप्त प्रकृति के होने का मतलब यह है कि इस बात का अनुमान लगाना असंभव है कि कितने लोग अभी भी गुप्त जगहों पर रखे गए हैं. संगठन ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति से कहा है कि हिरासत में लिए गए लोगों की केंद्रीय स्तर पर एक सूची तैयार की जानी चाहिए ताकि ग़ैरक़ानूनी कार्रवाइयों को रोका जा सके. संगठन की शोधकर्ता अंगलिका पाठक कहती हैं, "अमरीका के आतंकवाद के ख़िलाफ़ अभियान से पहले पाकिस्तान में लोगों के इस तरह लापता होने की ख़बरें न के बराबर आती थीं लेकिन अब ये एक अवधारणा जैसी बनती जा रही है जो संदिग्धों के अलावा और लोगों को भी प्रभावित कर रही है." ब्रितानी रिपोर्ट ग़ौरतलब है कि इससे पहले बीबीसी के न्यूज़नाइट कार्यक्रम ने ब्रिटेन के रक्षामंत्रालय की एक रिपोर्ट का हवाला दिया था जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई अल क़ायदा को सहयोग देती है. बीबीसी को मिले इस दस्तावेज में सुझाया गया था कि आईएसआई पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए. इस रिपोर्ट पर परवेज़ मुशर्रफ़ बेहद नाराज़ हुए थे. बाद में इसके बारे में ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने यह स्पष्टीकरण दिया था कि यह सरकार की राय नहीं है. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि परवेज़ मुशर्रफ़ पर पाकिस्तान में लोकतंत्र की बहाली के लिए भी दबाव डालना चाहिए. रक्षा मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि इस रिपोर्ट को किसी नए अधिकारी ने तैयार किया था और यह किसी नीति निर्धारक अधिकारी की नज़रों से नहीं गुज़रा है. | इससे जुड़ी ख़बरें उनकी बात जो 'गुमशुदा' हैं05 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप12 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस अमरीका गुप्त जेलें तुरंत बंद करे:समिति28 जुलाई, 2006 | पहला पन्ना 'दारफ़ुर में सामूहिक हत्याओं के सबूत'15 जून, 2006 | पहला पन्ना मानवाधिकार हनन:चीन पर गंभीर आरोप23 मई, 2006 | पहला पन्ना अमरीका ने उत्पीड़न के आरोपों को नकारा05 मई, 2006 | पहला पन्ना 'अमरीकी हिरासत में सौ की मौत'22 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतनामो की वैधानिकता पर चिंता19 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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