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अमरीका ने उत्पीड़न के आरोपों को नकारा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका ने आतंकवाद के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई के तहत संदिग्ध व्यक्तियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को जायज़ ठहराया है. अमरीका ने इन संदिग्ध चरमपंथियों के साथ किए जाने वाले व्यवहार को उत्पीड़न कहे जाने पर आपत्ति जताई है. मानवाधिकार मामलों के अमरीकी सहायक विदेश मंत्री बैरी लोवेन्करॉन ने जिनीवा में उत्पीड़न के ख़िलाफ़ समिति में अपनी बात रखते हुए कहा कि अमरीकी क़ानून में उत्पीड़न की कोई जगह नहीं है. अमरीकी अधिकारी ग्यारह सितंबर के हमले के बाद पहली बार संयुक्त राष्ट्र की इस समिति के समक्ष उपस्थित हो रहे हैं. उल्लेखनीय है कि मानवाधिकार संगठन अमरीका पर उत्पीड़न के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र की संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं. उनका आरोप है कि अमरीका दुनिया भर में बनाए गए अपने बंदी गृहों में दूसरे देशों के संदिग्ध चरमपंथियों को प्रताड़ित करता है. 'उत्पीड़न ग़लत है' लॉवेन्करॉन ने कहा, "मेरी सरकार की नीति साफ़ है: अमरीकी क़ानून और अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत हमारे दायित्व उत्पीड़न की इजाज़त नहीं देते. उत्पीड़न ग़लत है." उन्होंने इराक़ में अबू ग़रेब जेल में अमरीकी सैनिकों द्वारा क़ैदियों को उत्पीड़ित किए जाने को अक्षम्य बताया. उन्होंने कहा कि इस संबंध में 250 लोगों पर मामले चल रहे हैं. समिति अमरीका से 59 सवाल पूछना चाहती है जिनमें से 53 आतंकवाद के ख़िलाफ़ उसकी लड़ाई से जुड़े हैं. इससे पहले अमरीका के रक्षा उपमंत्री चार्ल्स स्टिम्सन ने कहा कि इराक़ और अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी हिरासत में 120 बंदियों की मौत हुई है जिनमें से 29 को प्रताड़ित किए जाने की आशंका है. | इससे जुड़ी ख़बरें प्रताड़ना पर अमरीका से सवाल-जवाब05 मई, 2006 | पहला पन्ना ग्वांतानामो के क़ैदियों के नाम सार्वजनिक20 अप्रैल, 2006 | पहला पन्ना इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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