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मानवाधिकार हनन:चीन पर गंभीर आरोप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल की महासचिव आइरीन काहन का कहना है कि दुनिया की सबसे ताक़तवर देश मानवाधिकार के साथ सबसे ज़्यादा खिलवाड़ कर रहे हैं. उनका कहना है कि 'आतंक के ख़िलाफ़ युद्द' के नाम पर वे वे मानवाधिकारों के प्रति अपने सिद्धांतों का त्याग करते चल रहे हैं. एशिया की दो महाशक्तियाँ चीन और भारत भी इस बार एमनेस्टी की निंदा के दायरे में हैं. उधर अमरीका ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि अमरीका बंदी शिविरों में किसी तरह का मानवाधिकार उल्लंघन नहीं कर रहा है. चीन में लाखों क़ैद केवल यदि संख्याओं की बात करें तो इस साल की रिपोर्ट में चीन मानवाधिकार हनन करने वाले देशों में उभर कर आता है. ऐमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि वहाँ लाखों लोग ऐसे हैं जो ग़लत कारणों से जेलों में बंद किए गए हैं और लाखों ऐसे हैं जिन्हें सरकारी ढर्रे पर लाने के लिए श्रम शिविरों में भेजा गया है. एमनेस्टी के अनुसार ये एक ऐसी व्यवस्था है जिसके तहत लोगों को एक तरह से चार साल तक बिना किसी मुकदमे या सुनवाई के प्रशासनिक व्यवस्था में क़ैद रखा जाता है. मानवाधिकार संगठन का कहना है कि फ़ालुन गोंग, उइगुर और तिब्बती धार्मिक गुटों और हर तरह के राजनीतिक गुटों के कार्यकर्ताओं को उनके मानवाधिकारों का हनन करके हिरासत में रखा गया है और उन पर यातना और बुरे बर्ताव का ख़तरा बना रहता है. ऐमनेस्टी की महासचिव आइरीन काहन का कहना है कि चीन ने अपने अंतरराष्ट्रीय प्रभाव का इस्तेमाल भी अच्छाई के लिए नहीं किया है. उन्होंने कहा है, " अंतरराष्ट्रीय जगत में में एक बड़ी आर्थिक शक्ति के रूप में उभरने के बाद चीन की ज़िम्मेदारियां और बढ़ती हैं. लेकिन चीन ने अपने देश में या बाहर मानवाधिकारों की रक्षा पर बिल्कुल ध्यान नहीं दिया है और कई ऐसे देशों के साथ भी आर्थिक संबंध बनाया है जो मानवाधिकारों का गला घोटते हैं." कश्मीर-गुजरात भारत के संदर्भ में इस रिपोर्ट में इतनी कड़ी बातें नहीं कही गई हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर में लगभग छह सौ लोगों को सार्वजनिक सुरक्षा क़ानून के तहत बंद रखा गया है, और कुछ को तो इस क़ानून के तहत बार-बार आरोप लगाकर दस साल से भी ज़्यादा समय से जेल में रखा गया है. लेकिन मोटे तौर पर भारत सरकार की आलोचना उन कार्यों के लिए नहीं की गई है जो उसने किए हैं बल्कि भारत आलोचना का पात्र उन कार्यों के लिए बना है जो करने में वो असफल रहा है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जो सैनिक, पुलिस अधिकारी या प्रशासनिक अधिकारी मानवाधिकारों का उल्लंघन करते हैं उन्हें शायद ही कभी सज़ा दी जाती है. इसमें गुजरात की ख़ासतौर से चर्चा की गई है और कहा गया है कि राज्य में मुसलमान समुदाय के लोगों की हत्या और महिलाओं का बलात्कार करने वालों को भी अब तक सज़ा नहीं दी गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत मानवाधिकार परिषद का सदस्य10 मई, 2006 | पहला पन्ना अमरीका ने उत्पीड़न के आरोपों को नकारा05 मई, 2006 | पहला पन्ना रुस में नस्लभेद 'नियंत्रण से बाहर'04 मई, 2006 | पहला पन्ना मामले की पूरी जाँच हो: मानवाधिकार गुट16 फ़रवरी, 2006 | पहला पन्ना इंडोनेशिया के 'अत्याचारों' का पुलिंदा21 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना 'आतंकवाद विरोधी नीति से मानवाधिकार पर आँच'19 जनवरी, 2006 | पहला पन्ना यातना मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र की निंदा08 दिसंबर, 2005 | पहला पन्ना ग्वांतनामो की वैधानिकता पर चिंता19 नवंबर, 2005 | पहला पन्ना | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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