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'पाकिस्तान को समझने की ज़रुरत' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने कहा है कि 'आतंक के ख़िलाफ़ लड़ाई' के लिए निंदा की जगह पाकिस्तान की जनता को समझने की ज़रुरत है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जनता धर्मभीरू है और असहिष्णु नहीं है. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के ज़्यादातर लोग अपने धार्मिक विश्वासों को लेकर संतुलित हैं. ब्रिटेन के ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में दिए गए भाषण में परवेज़ मुशर्रफ़ ने एमनेस्टी इंटरनेशनल के इस आरोप का खंडन किया कि सैकड़ों संदिग्ध आतंकवादी क़ैदियों को प्रताड़ित किया गया. लोकतंत्र अंतरराष्ट्रीय निशाने पर रहने की परवेज़ मुशर्रफ़ को आदत रही है लेकिन बीता हफ़्ता उनके लिए कठिन बीता है. पहले अमरीका और फिर ब्रिटेन में उनकी बडी निंदा हुई है और अलक़ायदा से निपटने में असफलता के आरोप लगे हैं. सैन्य तख़्तापलट के सात साल बाद ऑक्सफ़र्ड यूनिवर्सिटी में परवेज़ मुशर्रफ़ ने लोकतांत्रिक मूल्यों पर अपनी आस्था जताने की कोशिश की और कहा कि उनकी लोकतंत्र में गहरी आस्था है. हालांकि उन्होंने कहा कि वे समझते हैं कि एक सैनिक के लिए लोकतंत्र की बात करना कितना कठिन है लेकिन वे कह सकते हैं कि पाकिस्तान में कभी लोकतंत्र रहा ही नहीं. उनका कहना था कि लोकतंत्र को कभी पाकिस्तान की ज़रुरतों के मुताबिक़ कभी ढाला ही नहीं गया. जनरल मुशर्रफ़ ने कहा कि उन्होंने पाकिस्तान को एक नाकाम राष्ट्र में तब्दील होने से बचाया. | इससे जुड़ी ख़बरें करज़ई-मुशर्रफ़ एकजुट रहें-अमरीका28 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ ने आईएसआई की हिमायत की28 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस विमोचन से पहले ही मुशर्रफ़ की किताब पर बहस25 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुशर्रफ़ के बयान पर बुश हैरान22 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'अमरीका ने बमबारी की धमकी दी थी'21 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस नाकाम राष्ट्रों की सूची में पाकिस्तान ऊपर02 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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