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'सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएँगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे चुके अर्जुन मुंडा मानते हैं कि निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार चलाना बेहद मुश्किल होता है. चार निर्दलीय विधायकों के समर्थन वापस लेने से सरकार के अल्पमत में आ जाने के बाद मुख्यमंत्री ने गुरुवार को अपना इस्तीफ़ा राज्यपाल को सौंप दिया. अब विपक्षी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन यानी यूपीए उन्हीं चार विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने जा रही है. इस्तीफ़ा देने के बाद मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बीबीसी संवाददाता आलोक कुमार के साथ बातचीत में स्वीकार किया कि आगे जब भी चुनाव होंगे निर्दलीय विधायकों से समर्थन लेने पर वो गंभीरता से विचार करेंगे. पेश हैं बातचीत के कुछ अंश.. गुरुवार को जब आप विश्वास मत पेश करने वाले थे, आपने इस्तीफा क्यों दिया? इसलिए कि जिन शर्तों के साथ लोग समर्थन देना चाहते थे वे शर्त मुझे मंजूर नहीं थे. आज के माहौल में आप विपक्ष की भूमिका निभाना चाहेंगे या आप चाहते हैं कि नया चुनाव हो और नया जनादेश प्राप्त हो? नहीं, अगर लोग सरकार बनाना चाहते हैं तो मेरी ओर से कोई आपत्ति नहीं है. वैकल्पिक सरकार की क्या स्थिति होगी और आप की नज़र में राज्य का क्या भविष्य होगा? मैं इस समय ज़्यादा पूर्वानुमान नहीं करूँगा. पर अच्छी सरकार हो, अच्छी सब सुविधाएँ लोगों तक पहुँचे यह ज़रूरी है. विपक्ष की हैसियत से जो भूमिका हमारी होनी चाहिए निश्चित रूप से हम पूरा करने का प्रयत्न करेंगे. लेकिन इस बात का ध्यान निश्चित रूप से रखना चाहिए कि सरकार जनता की अपेक्षा के अनुरूप चले क्योंकि जनादेश तो हमारे साथ था लेकिन हम षडयंत्र के शिकार हुए हैं. आपकी नज़र में किसने ये षडयंत्र किया? अब यह स्पष्ट है कि निर्दलीय विधायकों को जिस ढंग से कहा गया कि निर्दलीय ही मुख्यमंत्री बनेंगे. तो यह समझ सकते हैं कि ये षडयंत्र की पराकाष्ठा है और इसे चरम पर कहा जाएगा. विपक्ष में रहते हुए आपकी पार्टी की क्या भूमिका होगी? राज्यहित में अग़र कुछ होता है तो बिलकुल सहयोग करेंगे, पर अच्छी सरकार होनी चाहिए और फ़ैसले जनता की अपेक्षा के अनुरूप होने चाहिए. अब जिस तरीके से कह रहे हैं कि निर्दलीय लोगों की सरकार बनेगी, निर्दलीय मुख्यमंत्री बनेंगे तो क्या अपेक्षा कर सकते हैं. आज जब आप मुख्यमंत्री नहीं हैं, इस्तीफ़ा दे दिया है तो राज्य की जनता को आपका क्या संदेश होगा? जनता का हम आभार व्यक्त करना चाहते हैं कि उन्होंने मुझे अवसर दिया. अवसर तो अब भी हमारा ही बनता है लेकिन संख्या गणित के हिसाब से हम इस समय सरकार में नहीं है. साथ ही यह भी वास्तविकता है कि सबसे बड़े दल, सबसे बड़े गठबंधन के रूप में हम हैं और जनादेश हमारे साथ है. जनादेश के साथ खिलवाड़ किया गया है और यह हम जनता के बीच जाकर बताएंगे. आप अपन सरकार के प्रदर्शन को किस तरह आँकते हैं? हमने जनहित में फ़ैसले लिए. राज्य सरकार के काम को देश ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया. | इससे जुड़ी ख़बरें मुंडा ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया14 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस 'सोनिया तय करेंगी मुख्यमंत्री का नाम'14 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड में कोशिश कुनबा बचाने की10 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड में सरकार बनाने की कोशिशें तेज़06 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड सरकार का संकट गहराया05 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड की मुंडा सरकार अल्पमत में05 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड के जल संसाधन मंत्री 'नज़रबंद'04 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मुंडा सरकार पर संकट के बादल04 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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