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झारखंड सरकार का संकट गहराया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
झारखंड की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के संकट को लेकर दिल्ली में गहमागहमी तेज़ हो गई है. राज्य के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा भाजपा नेताओं से विचार विमर्श करने के लिए दिल्ली पहुँच गए हैं. इधर राज्य के जल संसाधन मंत्री कमलेश सिंह ने भी विरोध का झंडा उठा लिया है और कहा कि वो मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे देंगे. उन्होंने आरोप लगाया है कि उन्हें राज्य से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है. कमलेश सिंह ने बीबीसी को बताया कि जब वो राज्य की राजधानी रांची से कोलकाता जा रहे थे तो उन्हें जमशेदपुर में रोक लिया गया और उनकी तलाशी ली गई जिसके बाद उनसे कहा गया कि वो आगे नहीं जा सकते. उनका कहना था कि वो राज्य के तीन अन्य मंत्रियों से मिलने जाना चाह रहे थे. ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार के तीन मंत्री एनुस एक्का, मधु कोड़ा और हरिनारायण राय पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में जमे हुए हैं और उन्होंने मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के ख़िलाफ़ बयान दिए हैं. ये तीनों निर्दलीय विधायक हैं और विधानसभा चुनाव के बाद इन्होंने एनडीए को समर्थन दिया था. इन मंत्रियों के कारण 18 महीने पुरानी झारखंड सरकार पर संकट के बादल छा गए हैं. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' झारखंड की स्थिति में हमारा कोई हाथ नहीं है. यह सत्तारूढ दल का अंदरूनी मामला है और हम लोग स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं.'' उनका कहना था, '' हम सारी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित समय पर उचित निर्णय लेंगे.'' दूसरी ओर मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने बीबीसी के साथ बातचीत में आरोप लगाया कि कुछ लोग इन विधायकों को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना था, " हमारी सरकार अभी बहुमत में है लेकिन कुछ लोग इसे अस्थिर करने का प्रयत्न कर रहे हैं. वे नाकाम होंगे. " मामूली बहुमत ग़ौरतलब है कि 82 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में सरकार को सिर्फ़ 43 विधायकों का समर्थन प्राप्त है जिनमें विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी भी शामिल हैं. उधर विपक्षी यूपीए के खेमे में 39 विधायक हैं और सरकार का स्थायित्व पूरी तरह उन पाँच निर्दलीय विधायकों पर निर्भर है जो एनडीए को समर्थन दे रहे हैं. अगर पाँच में से तीन निर्दलीय विधायकों ने समर्थन वापस लिया तो मुंडा सरकार अल्पमत में आ जाएगी. झारखंड से कांग्रेसी सांसद और केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री सुबोधकांत सहाय का कहना था, "अगर सरकार गिरी और इन निर्दलीय विधायकों ने हमसे संपर्क किया तो हम निश्चित रुप से वैकल्पिक सरकार बनाने की कोशिश करेंगे क्योंकि हम नहीं चाहते कि राज्य में मध्यावधि चुनाव हो." राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता और केंद्रीय कोयला मंत्री शिबू सोरेन ने कहा, "अभी स्थिति साफ़ नहीं है. क्या होगा देखने वाली बात होगी." | इससे जुड़ी ख़बरें मुंडा सरकार पर संकट के बादल04 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड के जल संसाधन मंत्री 'नज़रबंद'04 सितंबर, 2006 | भारत और पड़ोस मरांडी का इस्तीफ़ा, नई पार्टी बनाएँगे18 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अपनी ही सरकार के ख़िलाफ़ मरांडी17 मई, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड के विपक्षी नेता राष्ट्रपति से मिले28 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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