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झारखंड के जल संसाधन मंत्री 'नज़रबंद'

मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा
मंत्री कमलेश सिंह ने बताया कि उनकी जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री के कहने पर ऐसा किया गया
राजनीतिक संकट के दौर से गुज़र रहे भारतीय राज्य झारखंड में ताज़ा घटनाक्रम में जल संसाधन मंत्री कमलेश सिंह ने राज्य की पुलिस पर आरोप लगाया है कि पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया है और उन्हें राज्य से बाहर नहीं जाने दिया जा रहा है.

कमलेश सिंह ने बीबीसी को बताया कि उन्हें जमशेदपुर ज़िले की पुलिस ने उस वक्त हिरासत में ले लिया जब वो राज्य की राजधानी रांची से कोलकाता जा रहे थे.

उनके मुताबिक पुलिस ने उन्हें जमशेदपुर में रोक लिया और उनकी तलाशी ली गई जिसके बाद उनसे कहा गया कि वो आगे नहीं जा सकते.

जब बीबीसी ने देर रात उनसे फ़ोन पर संपर्क किया तो उन्होंने बताया, "मेरी गाड़ी को एक थाना प्रभारी और 15-20 पुलिसकर्मियों ने रोक लिया. कहा गया कि तलाशी लेनी है. तलाशी के बाद हमसे कहा गया कि आगे नहीं जाना है. हमने कारण पूछा तो बताया गया कि ऐसा मुख्यमंत्री का आदेश है."

उन्होंने बताया कि वो कोलकाता से दिल्ली के लिए मंगलवार की सुबह रवाना होने वाले थे और वहाँ वो राज्य सरकार को समर्थन दे रहे तीन निर्दलीय विधायकों से मुलाक़ात करने वाले थे.

ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार के तीन मंत्री एनुस एक्का, मधु कोड़ा और हरिनारायण राय पिछले कुछ दिनों से मुख़्यमंत्री अर्जुन मुंडा के ख़िलाफ़ बयानबाजी करते रहे हैं.

पिछले तीन दिनों से ये विधायक दिल्ली आए हुए हैं जिसके बाद पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि ये विधायक राज्य सरकार से समर्थन वापस ले लेते हैं तो राज्य सरकार अल्पमत में आ सकती है.

कार्रवाई

राज्यमंत्री ने उनको 'हिरासत' में लिए जाने के पूरे घटनाक्रम के बारे में बीबीसी को बताया, "तलाशी के बाद हमारे साथ अभद्र व्यवहार किया गया. पुलिस वाले जबरन गाड़ी में बैठ गए और हमें इरिगेशन भवन में लाकर रखा गया है."

 मेरी गाड़ी को एक थाना प्रभारी और 15-20 पुलिसकर्मियों ने रोक लिया. कहा गया कि तलाशी लेनी है. तलाशी के बाद हमसे कहा गया कि आगे नहीं जाना है. हमने कारण पूछा तो बताया गया कि ऐसा मुख्यमंत्री का आदेश है
कमलेश सिंह, जल संसाधन मंत्री, झारखंड सरकार

उन्होंने कहा, "मैं दिल्ली जा रहा था ताकि नाराज़ विधायकों से जाकर बातचीत की जा सके और मिल बैठ कर स्थिति का समाधान निकाला जाता पर इस तरह से तो कोई समाधान नहीं निकल सकता है."

उन्होंने कहा कि अगर राज्य सरकार के एक मंत्री के साथ इस तरह का बर्ताव हो रहा है तो बाकी लोगों के साथ क्या होगा और यह काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण है.

यह पूछे जाने पर कि इस घटना के लिए वो किसको ज़िम्मेदार मानते हैं, उन्होंने कहा, "मैंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि मेरी मुख्यमंत्री से बात करा दी जाए पर अभी तक मेरी मुख्यमंत्री से कोई बातचीत नहीं कराई गई है."

घटनाक्रम

उनको हिरासत में लिए जाने के बाद अब उनकी आगे की रणनीति क्या होगी, पूछने पर उन्होंने कहा, "जिस काम के लिए जा रहा था वो तो अब संभव नहीं है. मुझे रोक दिया गया है इसलिए अब आगे जाने के बजाय राँची लौटना चाहूँगा. आगे की रणनीति पर फिर विचार किया जाएगा."

ग़ौरतलब है कि राज्य सरकार के पास 42 विधायक हैं जबकि विपक्ष में 39. तीन विधायकों के दिल्ली जाने के बाद से सरकार अल्पमत वाली स्थिति में मानी जा रही है.

हालांकि कमलेश सिंह ने ऐसा नहीं कहा है पर पर्यवेक्षकों का मानना है कि कमलेश सिंह के दिल्ली जाने और मुख्यमंत्री का विरोध कर रहे विधायकों के साथ मिल जाने से राज्य सरकार का वर्तमान राजनीतिक संकट और बढ़ सकता था.

ऐसा नहीं है कि इस तरह का वाकया राज्य में पहली बार हो रहा है. इससे पहले मार्च महीने में सरकार के गठन के दौरान भी अर्जुन मुंडा पर कथित रूप से निर्दलीय विधायकों को इस तरह अपने प्रभाव में लेने के आरोप लगे थे.

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