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रविवार, 10 सितंबर, 2006 को 10:38 GMT तक के समाचार
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झारखंड में कोशिश कुनबा बचाने की

विधानसभा
झारखंड में सभी दल अपनी पार्टी में फूट रोकने की कोशिश कर रहे हैं
झारखंड में मुंडा सरकार के विश्वास मत पेश करने की तिथि नजदीक आने के साथ ही सभी दलों के लिए अपने कुनबे को एकजुट रखना पहली प्राथमिकता हो गई है.

राज्य में मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार चार मंत्रियों के इस्तीफ़े और सरकार से समर्थन वापस लिए जाने के बाद अल्पमत में है.

राज्यपाल के आदेश पर विधानसभा अध्यक्ष इंदर सिंह नामधारी ने 14 सितंबर को विधानसभा की बैठक बुलाई है. इसी दिन मुख्यमंत्री विश्वास मत पेश करेंगे और अग़र इस पर बहस ज़ारी रहती है तो 15 सितंबर को मत विभाजन कराया जाएगा.

इसके मद्देनज़र सत्ता पक्ष और विपक्षी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के घटक दल अपने विधायकों के साथ लगातार संपर्क में है और उन्हें 'सुरक्षित' स्थानों पर रखा गया है.

एनडीए

भारतीय जनता पार्टी के झारखंड मामलों की प्रभारी सुमित्रा महाजन ने बीबीसी के साथ बातचीत में कांग्रेस पर राज्य सरकार को अस्थिर करने की साजिश रचने का आरोप लगाया.

 कुछ मंत्रियों के इस्तीफ़े के बावजूद हमारी सरकार बरकरार रहेगी. हम विपक्षी मंसूबे को सफल नहीं होने देंगे. हम कुछ समान विचारधारा वाले कुछ अन्य विधायकों का समर्थन लेंगे. इसकी कोशिश हो रही है
सुमित्रा महाजन

उन्होंने कहा, "जहाँ भी हमारी सरकार है उसे अस्थिर करने की कोशिश की जा रही है. ये बात सही है कि हमने झारखंड में सिर्फ एक-दो विधायकों के बहुमत से सरकार बनाई थी लेकिन भाजपा वहाँ सबसे बड़ी पार्टी है और हम ही स्थिर सरकार दे सकते हैं."

सुमित्रा महाजन ने कहा, "कुछ मंत्रियों के इस्तीफ़े के बावजूद हमारी सरकार बरकरार रहेगी. हम विपक्षी मंसूबे को सफल नहीं होने देंगे. हम कुछ समान विचारधारा वाले कुछ अन्य विधायकों का समर्थन लेंगे. इसकी कोशिश हो रही है."

एनडीए सरकार की अगुआई कर रही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष यदुनाथ पांडे ने बताया उनकी पार्टी के 30 विधायकों में से अधिकांश राजधानी राँची में ही है.

उन्होंने कहा, "भाजपा, जनता दल (यूनाईटेड) और सरकार को समर्थन दे रहे अन्य दल एकजुट हैं."

ख़रीद फ़रोख़्त का आरोप

विपक्षी यूपीए के सबसे बड़े घटक दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के अधिकांश विधायकों ने दिल्ली में डेरा डाल रखा है. झामुमो विधायक दल के नेता सुधीर महतो ने बीबीसी को बाताया कि सभी विधायक 13 सितंबर को राँची लौटेंगे.

विधानसभा में दलगत स्थिति
विधानसभा सदस्य संख्या - 82
भाजपा- 30
जदयू - 06
एनसीपी- 01
झामुमो -17
कॉंग्रेस - 09
राजद - 07
फॉरवॉर्ड ब्लॉक -02
माले - 01
यूजीडीपी - 02
निर्दलीय- 06
मनोनीत-01

उन्होंने यह भी बताया कि विधानसभा अध्यक्ष नामधारी ने जिन तीन निर्दलीय विधायकों को नोटिस जारी किया है, वे अपनी अनुपस्थिति में वकीलों के ज़रिए तय समयसीमा के अंतिम दिन सोमवार को अपना पक्ष रखेंगे.

विधायकों को राँची से बाहर रखने के फ़ैसले को सही ठहराते हुए सुधीर महतो ने कहा, "मुंडा सरकार पहले बाहुबल और अब धनबल से विधायकों के ख़रीद फरोख़्त की कोशिश कर रही है. इसलिए हमें भी रणनीति बनानी ही होगी."

उधर राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष गौतम सागर राणा ने बीबीसी के साथ बातचीत में स्वीकार किया उनके विधायक केरल में आराम कर रहे हैं.

उन्होंने कहा, "सरकार अपने ताकत प्रयोग कर रही है. इससे बचने के लिए ही विधायकों को यहाँ से अलग रखा गया है. वे सही समय लौट आएँगे."

उन्होंने इस बात को बेबुनियाद बताया कि उनकी पार्टी में फूट पैदा हो गए हैं.

यूपीए के अन्य घटक दल कांग्रेस के विधायक चंडीगढ़ में ठहरे हुए हैं. चंडीगढ़ से ही झारखंड कांग्रेस के अध्यक्ष प्रदीप कुमार बालमुचू ने कहा, "वहाँ (राँची) जाने से अभी क्या फायदा है. यहाँ रहना इसलिए ज़रुरी है कि झारखंड में वैकल्पिक सरकार का गठन हो जाए."

फॉरवर्ड ब्लॉक से निष्कासित किए गए विधायक भानुप्रताप शाही ने कहा कि वह किसी भी सूरत में मुंडा सरकार के विश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे.

यह पूछने पर कि वो कहाँ हैं, उन्होंने कहा, "मैं सिंगापुर में हूँ. 14 को आऊँगा (राँची) और सदन की कार्यवाही में भाग लूंगा."

नामधारी का विरोध

विधानसभा अध्यक्ष नामधारी के तीन निर्दलीय विधायकों के ख़िलाफ़ नोटिस जारी करने के विरोध में रविवार को राँची स्थित उनके आवास का घेराव किया गया.

राजद नेता गौतम सागर राणा ने उन पर मुख्यमंत्री के पक्ष में काम करने और तीनों विधायकों की सदस्यता समाप्त करने की साजिश रचने का आरोप लगाया.

ग़ौरतलब है कि तीनों विधायकों-स्टीफन मरांडी, एनुस एक्का और कमलेश सिंह- ने विधानसभा अध्यक्ष से मिले नोटिस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती है जिस पर सोमवार को विचार किया जाएगा.

82 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में एनडीए को 43 सदस्यों का समर्थन प्राप्त था जो अब घट कर 39 रह गई है. इस्तीफ़ा देने वाले चारो मंत्रियों ने यूपीए से हाथ मिलाया है.

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