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'धमाकों से फिर दहला महाराष्ट्र' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सभी अख़बार मालेगाँव के बम धमाकों की ख़बरों से भरे हुए हैं. दैनिक जागरण का शीर्षक है- धमाकों से थर्राया मालेगाँव. अख़बार लिखता है कि 11 जुलाई को मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए धमाकों के दो माह बाद शुक्रवार को फिर महाराष्ट्र के मालेगाँव में हुए सिलसिलेवार तीन धमाकों ने लोगों को दहला दिया. अख़बार लिखता है कि केंद्र सरकार सांप्रदायिक तनाव की आशंका से चौकस है. राष्ट्रीय सहारा का शीर्षक है- तीन धमाकों से दहला मालेगाँव, 37 मरे. अख़बार लिखता है कि मालेगाँव में मस्जिद के पास विस्फोट के बाद ह्दयविदारक दृश्य था. लोग एक संकरे दरवाज़े से बाहर निकल रहे थे. लोग रास्ते में पड़े मृतकों और गंभीर रूप से घायल लोगों पर चढ़कर भाग रहे थे. अंग्रेज़ी दैनिक इंडियन एक्सप्रेस की हेडिंग है- आतंक का 38 लोग निशाना बने, पहले से ही बंटे हुए शहर को निशाना बनाया. पंजाब केसरी ने ख़बर छापी है कि इस घटना के बाद राजधानी दिल्ली समेत कई राज्यों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. अमर उजाला का शीर्षक है- मालेगाँव में मस्जिद के पास धमाके. अख़बार लिखता है कि बड़े शहरों में करोड़ों लोगों पर नज़र रखना मुश्किल है लेकिन बमुश्किल चार लाख की आबादी वाले मालेगाँव में खु़फ़िया तंत्र की कमजोरी निराश करती है. हिंदुस्तान का शीर्षक है- मस्जिद पर आतंकी हमला. अख़बार लिखता है कि मालेगाँव के धमाकों को जिस तरह से अंजाम दिया गया, उससे आशंका जाहिर की जा रही है कि चरमपंथी फकीर के वेष में आए थे. हिंदुस्तान टाइम्स की हेडिंग है- आतंक ने सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाक़े को निशाना बनाया. अख़बार लिखता है कि मालेगाँव के सांप्रदायिक इतिहास और बेराज़गार नवयुवकों की बड़ी संख्या और संवदेनशीलता की वजह से ही शायद उसे निशाना बनाया गया. पायनियर की हेडिंग है- मालेगाँव का काला शुक्रवार. अख़बार लिखता है कि आंतक ने एक बार फिर महाराष्ट्र को निशाना बनाया है. टाइम्स ऑफ इंडिया लिखता है कि मालेगाँव का हिंसा का इतिहास रहा है और उसने 1963 से अब तक वहाँ हुई हिंसा की जानकारी दी है. |
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