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मालेगाँव के अस्पतालों में अफ़रातफ़री | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र के मालेगाँव के अस्पतालों में अब भी अफ़रातफ़री का मौहाल है. मालेगाँव में कई छोटे-छोटे अस्पताल हैं और बम धमाकों के घायलों को इन्हीं अस्पतालों में लाया गया था. मृतकों और घायलों के रिश्तेदार बड़ी संख्या में यहाँ आ रहे हैं. अस्पतालों को इतनी बड़ी संख्या में लोगों से निबटने में मुश्कल पेश आ रही है. बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद ने जब शुक्रवार रात को मालेगाँव का दौरा किया और पाया कि देर रात तक घायलों को अस्पताल लाया जा रहा था. बीबीसी से बातचीत में इमरान नामक एक शख्स ने बताया कि उसके परिवार के तीन लोगों की मौत इन धमाकों में हुई है. उनका कहना था कि वो ये दुख बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं. मालेगाँव के वाडिया अस्पताल में भर्ती सात वर्षीय शहजाद ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया,'' मैं नमाज़ पढ़ने जा रहा था, उस वक्त मैंने धमाके सुने. लोग भाग रहे थे और चिल्ला रहे थे, उसके बाद मुझे पता नहीं कि क्या हुआ क्योंकि मैं घायल था और मुझे अस्पताल ले आया गया.'' इसी अस्पताल में धमाके के बाद ज़्यादातर घायलों को लाया गया था. ग़ौरतलब है कि इन धमाकों में कई छोटे बच्चे मारे गए हैं. घटना के एक प्रत्यक्षदर्शी उदय कुलकर्णी ने बीबीसी को बताया,'' धमाकों की ख़बर के बाद तुरंत बाद मैं घटनास्थल पर पहुँचा और मैंने देखा कि वहाँ अफ़रातफ़री का माहौल था. हर कोई भाग रहा था. मैंने देखा कि बड़ी संख्या में लोग घायल थे.'' मालेगाँव मेडिकेयर हॉस्पीटल के डॉक्टर वर्धमान लोढ़ा दोपहर के वक्त ड्यूटी पर थे जब धमाके के बाद भीड़ घायलों को लेकर आनी शुरू हुई. उन्होंने बताया कि कई लोग हताहतों को लेकर हमारे अस्पताल में आए. इसमें से 20 को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया जबकि कई अन्य की अस्पताल लाए जाने से पहले ही मौत हो चुकी थी. महाराष्ट्र के मालेगाँव में शुक्रवार को हुए बम धमाकों में कम से कम 37 लोगों की मौत हो गई थी. हालांकि महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक पीएस पसरीचा ने घटना के एक दिन बाद शनिवार को बताया कि मृतकों की संख्या 32 ही है. धमाके उस समय हुए जब बहुत से मुसलमान जुमे की नमाज़ के लिए इकट्ठा हुए थे. |
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