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बुधवार, 30 अगस्त, 2006 को 02:20 GMT तक के समाचार
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नहीं मिल सका है नवाब बुगटी का शव
नवाब अकबर बुगटी
बुगटी की मौत के बाद से बलूचिस्तान में कई जगह हिंसक घटनाएँ हो रही हैं
पाकिस्तान के बलूचिस्तान के क्वेटा प्रांत के कबायली नेता नवाब अकबर बुगटी का शव अभी तक बरामद नहीं हुआ है. इस वजह से विरोध और हिंसा का दौर थम नहीं रहा है.

इससे पहले मंगलवार को नवाब अकबर बुगटी के लिए नमाज़े जनाज़ा पढ़ी गई जिसके बाद बलूचिस्तान में फिर से हिंसा भड़क उठी.

कबायली नेता नवाब बुगटी शनिवार को बलूचिस्तान की पहाड़ियों पर हुए सैन्य हमले में मारे गए थे.

सरकारी हवाले से बताया गया है कि गुफ़ा धंस जाने के कारण बुगटी का शव अभी तक बरामद नहीं हो सका है.

बलूचिस्तान सरकार का कहना है कि शव को तलाश करने में अभी समय लग सकता है लेकिन बुगटी के बेटे तलाल बुगटी ने कहा है कि उन्हें सरकार के इस दावे पर संदेह है.

उन्होंने बताया, "सरकार ने मुझसे संपर्क किया और कहा कि मुझे एक हैलिकॉप्टर के ज़रिए उस पहाड़ी तक ले जाया जाएगा जहाँ नवाब साहब का शव दबा हुआ है. मुझे इस पर बिलकुल विश्वास नहीं है."

वो कहते हैं, "नवाब साहब का शव एक अन्य हैलीकॉप्टर से डेरा बुगटी पहुँचा दिया गया होगा जैसा पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के साथ हुआ था. उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया गया और फिर चुपचाप दफ़ना भी दिया गया था. "

विरोध

उधर बलूचिस्तान के क्षेत्रीय दलों ने कहा है कि वे बुगटी की हत्या के विरोध में राष्ट्रीय राजमार्गों पर आज से चक्का जाम करेंगे.

 सरकार ने मुझसे संपर्क किया और कहा कि मुझे एक हैलिकॉप्टर के ज़रिए उस पहाड़ी तक ले जाया जाएगा जहाँ नवाब साहब का शव दबा हुआ है. मुझे इस पर बिलकुल विश्वास नहीं है
तलाल बुगटी, नवाब अकबर बुगटी के बेटे

बीबीसी संवाददाता अज़ीज़ुल्ला खान ने बताया है कि इन क्षेत्रीय दलों की ओर से हिदायत दी गई है कि कराची, पंजाब जैसी कई प्रमुख जगहों की ओर जाने वाले राजमार्गों पर बुधवार को चक्काजाम किया जाएगा.

उन्होंने बताया कि विरोध कर रहे लोग अधिकतर सरकारी इमारतों को नुक़सान पहुँचा रहे हैं जिनमें दफ़्तर, बैंक आदि शामिल हैं.

इसके अलावा उन लोगों के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी क्षति पहुँचाई गई है जो इस क्षेत्र में कारोबार तो कर रहे हैं पर इस क्षेत्र के मूल निवासी नहीं हैं.

इस बाबत जब क्षेत्रीय दलों के नेताओं से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जबतक इस स्थिति का कोई समाधान नहीं निकल जाता, इस तरह के विरोध प्रदर्शन होते रहेंगे.

उधर बलूचिस्तान के संसदीय प्रतिनिधि इस हत्या पर अपना विरोध जताने के लिये संसद से इस्तीफा देने के बारे में विचार कर रहे हैं.

नमाज़े जनाज़ा
मंगलवार को नमाज़े जनाज़ा में 10 हज़ार से भी ज़्यादा लोग शामिल हुए

बलूचिस्तान के पूर्व मुख्यमंत्री और बलूचिस्तान नेशनल पार्टी मेंगल ग्रुप के नेता अख़्तर मेंगल ने इस बाबत बीबीसी को बताया, "ऐसी संसद जो इस स्थिति का कोई हल न निकाल पाए, उसमें रहना बेकार है. सरकार को चाहिए कि सबको साथ लेकर कोई फ़ैसला करे."

भारत पर असर

बलूचिस्तान में चल रहे घटनाक्रम से भारत पर भी असर पड़ रहा है, ख़ास तौर पर पाकिस्तान के रास्ते होकर ईरान से लाई जाने वाली गैस पाइप लाइन के संदर्भ में.

इस बारे में अपस्ट्रीम पत्रिका के भारत संपादक नरेंदेर तनेजा बताते हैं कि अगर वहाँ स्थायी समाधान नहीं खोजा जाता है तो इससे भारत तक गैस पाइपलाइन लाने में परेशानियाँ बढ़ सकती हैं.

ग़ौरतलब है कि पाकिस्तान का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा बलूचिस्तान में आता है और माना जा रहा है कि गैस पाइप लाइन का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर भारत आएगा.

ऐसे में हिंसा का ताज़ा दौर गैस कंपनियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.

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