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बुगटी की हत्या दुर्भाग्यपूर्ण: भारत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के विदेश विभाग ने पाकिस्तान के बलूच नेता नवाब अकबर बुगटी की 'हत्या को दुर्भाग्यपूर्ण' बताया है और कहा है कि सैन्य ताकत से राजनीतिक समस्या का समाधान कभी नहीं हो सकता है. विदेश विभाग के प्रवक्ता नवतेज सरना का कहना था,'' बलूच नेता नवाब अकबर ख़ान बुगटी की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या बलूचिस्तान और पाकिस्तान के लोगों के लिए बड़ी क्षति है.'' प्रवक्ता का कहना था,'' सैन्य अभियान में उनके दो पोते भी मारे गए और कई अन्य लोगों की जान गई, उसने इस बात की ज़रूरत को रेखांकित किया है कि बलूचिस्तान के लोगों की शिकायतों और आकांक्षाओं के लिए शांतिपूर्ण संवाद की ज़रूरत है.'' भारत के विदेश विभाग का कहना था,'' सैनिक ताकत से राजनीतिक समस्या का कभी समाधान नहीं हो सकता है. नवाब अकबर ख़ान बुगटी ने चार दशकों तक पाकिस्तान की राजनीति में अहम भूमिका निभाई. उनकी मौत से जो जगह खाली हुई है, उसे भरना बड़ा मुश्किल है.'' विरोध में हड़ताल दूसरी ओर बुगटी के मारे जाने के विरोध में बलूचिस्तान में सोमवार को हड़ताल रही. पूरे सूबे में वाहन सड़कों पर नहीं चल रही हैं और दुकानें बंद हैं.
सूबे के मंत्री शेर जन बलोच ने बताया कि राजधानी क्वेटा से 700 किलोमीटर दूर पसनी में सरकारी दफ़्तरों को नुक़सान पहुँचाने और एक बैंक को आग लगाने की कोशिश की गई. इसे रोकने के लिए सुरक्षाबलों ने गोली चलाई जिससे छह लोग घायल हो गए. इनमें से एक की हालत चिंताजनक है. क्वेटा के पुलिस प्रमुख सलमान सईद ने बताया कि सार्वजनिक संपत्ति को नुक़सान पहुँचाने के लिए कई लोगों को गिरफ़्तार किए गए और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा. इसके पहले पाकिस्तानी सेना का कहना था कि एक सर्च ऑपरेशन किया गया और इस दौरान सेना और विद्रोहियों के बीच जमकर गोलीबारी हुई जिसमें एक गुफा पूरी तरह तबाह हो गई. माना जा रहा है कि कई चरमपंथियों सहित अकबर बुगटी इस गुफा में थे और वो इस गुफा में दबकर मर गए. बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और खनिज पदार्थ यहाँ बड़ी मात्रा में पाए जाते हैं. पाकिस्तान में गैस की ज़्यादातर आपूर्ति इसी इलाक़े से होती है. लेकिन बलूच विद्रोही आरोप लगाते रहे हैं कि पाकिस्तान सरकार ने इस प्रांत को नज़रअंदाज़ किया है. बीबीसी संवाददाता के मुताबिक नवाब अकबर बुगटी बलूचिस्तान की राजनीति में पाँच दशकों से भी ज़्यादा समय तक छाए रहे. उन्हें 'बलूचिस्तान का शेर' कहा जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें बुगटी की मौत के बाद हिंसा भड़की27 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस पाकिस्तान के क़बायली नेता की मौत26 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस बलूचिस्तान में 23 चरमपंथी मारे गए09 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस क्वेटा धमाके में छह पुलिसवालों की मौत11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस 'बलूचिस्तान में सैनिक कार्रवाई में 19 मरे'21 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस बलूचिस्तानः पाकिस्तान का पिछड़ा प्रांत02 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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