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संसद में परमाणु सहमति पर बहस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय संसद में गुरुवार को भारत और अमरीका के बीच पहमाणु सहमति को लेकर ज़ोरदार बहस जारी है. बहस के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु सहमति पर राज्यसभा में बयान दिया है. सहमति पर केंद्र सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए सरकार को बाहर से समर्थन दे रही मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि सरकार को परमाणु सहमति के मद्देनज़र भारत को एक स्पष्ट नीति बनानी होगी. उन्होंने कहा, "सरकार को एक प्रस्ताव या घोषणा पत्र के रूप में अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए ताकि यह साफ़ हो सके कि हमारी नीति की आधारभूत बातें क्या होंगी जिनके नीचे कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा." सदन में चर्चा के दौरान पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि सरकार को ध्यान रखना होगा कि भारतीय हितों की अनदेखी न हो और न ही सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का समझौता किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने अपनी नीतियों के बारे में सदन को सूचित किए बिना ही कई फ़ैसले लिए. इसपर विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए विदेश राज्यमंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि पिछली सरकार के शासनकाल में परमाणु नीति के बारे में देश और सदन को अंधेरे में रखा गया. घेराव यूपीए सरकार के सहयोगी वामपंथी दलों ने भी इस पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि अमरीका मूल सहमति से हट रहा है. दूसरी ओर विपक्षी दल भाजपा और समाजवादी पार्टी भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरने की कोशिश कर रही है. विपक्षी गठबंधन एनडीए के नेता तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रपति कलाम से मिले थे और उन्हें इस संबंध में एक ज्ञापन भी दिया था. इसमें कहा गया है कि परमाणु सहयोग के क्षेत्र में भारत और अमरीका के बीच हुए समझौते को अमल में लाने के लिए जो विधेयक अमरीकी संसद में लाया जा रहा है उसमें कई ऐसी शर्तें हैं जिससे देश की सुरक्षा को ख़तरा पैदा हो सकता है. विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा का कहना है कि प्रधानमंत्री पहले ही संसद और राष्ट्र को ये आश्वासन दे चुके हैं कि जुलाई, 2005 के समझौते में कोई बदलाव नहीं होगा. प्रेक्षकों का कहना है कि काँग्रेस से हाल में निलंबित पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह भी इस मुद्दे पर सरकार को परेशानी में डाल सकते हैं. वैज्ञानिकों की चिंता हाल में कुछ भारतीय वैज्ञानिकों ने इस सहमति पर सवाल उठाए थे. इन वैज्ञानिकों ने अमरीका के साथ हो रही सहमति के बदले मापदंडों पर चिंता व्यक्त करते हुए 14 अगस्त को एक साझा वक्तव्य जारी किया था.
इसको देखते हुए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वरिष्ठ भारतीय परमाणु वैज्ञानिकों के साथ परमाणु सहमति पर बुधवार को चर्चा की. माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री की कोशिश है कि वे अपने वक्तव्य से न केवल राजनेताओं को बल्कि देश के वैज्ञानिकों को भी संतुष्ट कर पाएँ. परमाणु ऊर्जा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एमआर श्रीनिवासन समेत आठ वैज्ञानिकों का कहना हैं कि जिस तरह अमरीकी संसद 18 जुलाई की सहमति में बदलाव ला रही है, उससे वे चिंतित हैं. वैज्ञानिकों को आशंका है कि अगर अमरीका 18 जुलाई की सहमति में संशोधन करेगा तो भारत को परमाणु और मिसाइल परीक्षण में मुश्किल पेश आएगी. सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय हितों पर समझौता नहीं किया गया है और किसी ऐसे बदलाव को सरकार स्वीकार नहीं करेगी. वैज्ञानिकों का मत है कि भारत को अमरीकी संसद में पारित किए गए संशोधनों पर आपत्ति प्रकट करनी चाहिए. |
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