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जसवंत के ख़िलाफ विशेषाधिकार नोटिस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य नारायणस्वामी ने सदन में कविपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेता जसवंत सिंह के ख़िलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस दिया है. इस मुद्दे पर बुधवार को संसद में काफ़ी हंगामा हुआ. शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के सांसद नारायणस्वामी ने यह मुद्दा उठाया लेकिन सभापति भैरों सिंह शेखावत ने उन्हें और कुछ भी कहने से मना किया. शेखावत ने कहा कि उन्हें यह नोटिस मिल चुका है और वो इस पर विचार करने के बाद कोई फ़ैसला करेंगे और तब तक किसी को इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहना चाहिए. पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यालय में 'जासूस' होने के मुद्दे पर जसवंत सिंह के बार-बार बदल रहे बयानों से नाराज़ कांग्रेस सांसद ने विशेषाधिकार नोटिस दिया है. जसवंत सिंह ने मंगलवार को अपने बयानों में अमरीका के एक राजदूत का ज़िक्र किया था लेकिन उस राजदूत के हवाले से बुधवार को अख़बारों में ख़बर छपी कि उन्होंने न तो कोई पत्र लिखा था और न ही उस समय वो भारत में थे जिस समय का ज़िक्र जसवंत सिंह ने किया है. इस से नाराज़ कांग्रेसी सांसदों का आरोप था कि जसवंत सिंह ने संसद को इस मुद्दे पर गुमराह किया है. पुस्तक पर विवाद पिछले दिनों जसवंत सिंह की पुस्तक 'ए कॉल टू ऑनर' के प्रकाशित होने के बाद से पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में भेदिया होने को लेकर विवाद शुरु हो गया था. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने इस मुद्दे पर बयान देते हुए कहा था कि जासूस का नाम बताया जाना चाहिए लेकिन जसवंत सिंह ने नाम नहीं बताया. इस मुद्दे ने इतना तूल पकड़ा कि जसवंत सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा. उनका कहना था कि उन्होंने पूरी जानकारी प्रधानमंत्री को भेज दी है. जब ये मामला संसद में फिर उठा तो कहा गया कि जसवंत सिंह ने जो दस्तावेज़ प्रधानमंत्री को भेजे हैं उन पर न कोई मुहर है न कोई 'लेटरहेड.' प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि जसवंत सिंह एक साधारण सवाल का जवाब क्यों नहीं दे रहे कि वे किस व्यक्ति की बात कर रहे हैं. उधर जसवंत सिंह का कहना था कि उन्हें आश्चर्य है कि गुप्तचर एजेंसी की जानकारी के बारे में मुहर या 'लेटरहेड' की बात की जा रही है क्योंकि ऐसी जानकारी आमतौर पर आम काग़ज पर ही होती है. मामला बढ़ता गया और संसद में इस मुद्दे पर जसवंत सिंह ने ख़ुद को घिरा पाया. अब इंतज़ार है कि राज्य सभा के सभापति विशेषाधिकार संबंधी मामले में क्या फ़ैसला लेते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'साहस है तो जसवंत मुख़बिर का नाम लें'23 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री को नाम बताएँगे जसवंत सिंह24 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस जसवंत पलटे, अभी नाम बताने से इनकार26 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'प्रधानमंत्री को पूरी जानकारी भेज दी है'29 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस चिट्ठी में मुख़बिर का नाम नहीं: पीएमओ30 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'सारे सवालों के जवाब देने को तैयार हूँ'31 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस भेदिए का नाम नहीं बताया जसवंत ने01 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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