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'सारे सवालों के जवाब देने को तैयार हूँ' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह ने कहा है कि वे प्रधानमंत्री कार्यालय में कथित भेदिए के मामले में सभी सवालों के जवाब देने को तैयार हैं. राज्यसभा में सदस्यों के बहुत सारे सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि वे इस मामले में कोई सनसनी पैदा नहीं करना चाहते लेकिन वे हर सवाल का जवाब देने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि राज्यसभा के सभापति को यह तय करना चाहिए कि सवाल-जवाब किस स्वरुप में होंगे. राज्यसभा के सभापति भैरोसिंह शेखावत ने कहा है कि ये मुद्दा महत्वपूर्ण है और इस पर चर्चा करवाई जाएगी. समाजवादी पार्टी के शाहिद सिद्दीकी और कांग्रेस के वी नारायण स्वामी ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री कार्यालय में कौन था जिसने अमरीका को परमाणु जानकारियाँ दी थीं. नारायण स्वामी चाहते थे कि जसवंत सिंह राज्यसभा में उस कथित भेदिए का नाम बताएँ. लेकिन संसदीयकार्य राज्यमंत्री सुरेश पचौरी ने कहा कि इसके अलावा कई और सवाल हैं जैसे कि 'आतंकवादी मसूद अज़हर को रिहा किए जाने में' और फ़िरौती देने के मामले में प्रमुख भूमिका किसने निभाई. इससे पहले जसवंत रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के जवाब में एक और पत्र प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेजा है. इस नए पत्र में जसवंत सिंह ने कहा है कि उनके पास जो भी जानकारी थी, उन्होंने पहले ही भिजवा दी है. आरोप-प्रत्यारोप प्रधानमंत्री कार्यालय में कथित भेदिए को लेकर आरोप प्रत्यारोप और चिट्ठी लिखे जाने का दौर पिछले हफ़्ते से चल रहा है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने रविवार को कहा था कि भाजपा नेता जसवंत सिंह ने जो चिट्ठी प्रधानमंत्री को दी है, उसमें कथित अमरीकी भेदिए का नाम नहीं है. उल्लेखनीय है कि जसवंत सिंह ने शनिवार को कहा था कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव के कार्यकाल में सक्रिय 'अमरीकी भेदिए' के बारे में पूरी जानकारी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भेज दी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारु ने बताया था जसवंत सिंह ने अपनी चिट्ठी में वही जानकारियाँ दीं जो उन्होंने अब तक मीडिया में सार्वजनिक की थीं. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जसवंत सिंह को लिखी जवाबी चिट्ठी में पूछा है कि उन्होंने ये जानकारी पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को क्यों नहीं दी. प्रधानमंत्री ने दस्तावेज़ की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए थे. प्रधानमंत्री ने पूछा है कि जब ये दस्तावज़ जसवंत सिंह के पास, उनके केंद्रीय मंत्री रहते हुए था, तो उन्होंने इसे पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को क्यों नहीं सौंपा. प्रधानमंत्री ने कहा है कि यदि उनके पास कोई और जानकारी है, जो वे सार्वजनिक करना चाहते हों, उन्हें भेज सकते हैं. उल्लेखनीय है कि पूर्व विदेश मंत्री सिंह ने हाल में प्रकाशित अपनी किताब 'कॉल टू ऑनर' में आरोप लगाया था कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव के कार्यकाल में एक अधिकारी ने भारत के परमाणु कार्यक्रम के बारे में अमरीका को गुप्त जानकारी प्रदान की थी. कुछ दिन पहले जब वरिष्ठ भाजपा नेता ने ये जानकारी सार्वजनिक की थी तब राजनीतिक और मीडिया हलकों में ख़लबली मच गई थी. लेकिन उस समय भी उन्होंने अमरीका को संवेदनशील जानकारियाँ देने वाले इस व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया था. इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि यदि साहस हो तो जसवंत सिंह उस व्यक्ति का नाम बताएँ. | इससे जुड़ी ख़बरें चिट्ठी में मुख़बिर का नाम नहीं: पीएमओ30 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'प्रधानमंत्री को पूरी जानकारी भेज दी है'29 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री को नाम बताएँगे जसवंत सिंह24 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'साहस है तो जसवंत मुख़बिर का नाम लें'23 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'माओवादियों से निपटने में सेना न लगाएँ'04 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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