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भेदिए का नाम नहीं बताया जसवंत ने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह ने यह कहकर प्रधानमंत्री कार्यालय के कथित भेदिए का नाम नहीं बताया है कि सरकार चाहे तो उसकी पहचान कर सकती है. राज्यसभा में मंगलवार को हुई चर्चा में जसवंत सिंह ने आरोप लगाया कि अमरीका की कोशिश रही है और अभी भी कोशिश है कि भारत के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण लगाया जाए. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने चर्चा के अंत में कहा कि जसवंत सिंह पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय और वर्तमान प्रधानमंत्री कार्यालय में 'अमरीका का भेदिया' होने का आरोप लगा रहे हैं तो उन्हें 'भेदिए का नाम बताना चाहिए' वरना देश की जनता अपना निष्कर्ष निकाल सकती है. जसवंत सिंह ने हाल ही में प्रकाशित अपनी किताब 'ए कॉल टू ऑनर' में आरोप लगाया है कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव के कार्यालय में 'एक भेदिया था' जो परमाणु कार्यक्रम सहित संवेदनशील मुद्दो पर अमरीका को जानकारियाँ दे रहा था. गेंद सरकार के पाले में इसके बाद पिछले एक हफ़्ते से भी अधिक समय से आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है और रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय ने कह दिया था कि जसवंत सिंह ने कोई नाम नहीं बताए हैं और उनके दस्तावेज़ प्रामाणिक भी नहीं हैं. राज्यसभा में विपक्ष के नेता उन नोटिसों का जवाब दे रहे थे जिसमें कहा गया था कि जसवंत सिंह को प्रधानमंत्री कार्यालय में भेदिए का नाम बताना चाहिए. ये नोटिस समाजवादी पार्टी के शाहिद सिद्दीकी और कांग्रेस के नारायण स्वामी ने दिया था. शोर-शराबे और टोकाटाकी के बीच दो घंटों से अधिक समय में जसवंत सिंह ने अपनी बात रखी. उन्होंने प्रधानमंत्री को भेजे गए दस्वावेज़ के विवरण देते हुए कहा कि यह कहना ठीक नहीं है कि यह दस्तावेज़ प्रामाणिक नहीं है क्योंकि प्रधानमंत्री जानते हैं कि ख़ुफ़िया एजेंसियाँ लेटरहैड और हस्ताक्षर के साथ दस्तावेज़ नहीं देतीं. कांग्रेस सहित कई दलों के सदस्य बार-बार पूछते रहे कि जसवंत सिंह भेदिए का नाम बताएँ लेकिन उन्होंने सीधे कोई नाम नहीं बताया. इस बीच केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने कहा कि जसवंत सिंह को उस भेदिए का नाम ज़रुर बताना चाहिए क्योंकि उनके आरोपों के बात वे ख़ुद और कई अन्य लोग शक के दायरे में आ गए हैं जो नरसिंह राव के समय प्रधानमंत्री कार्यालय में थे. जसवंत सिंह ने चर्चा के आख़िर में कहा, "सब कुछ स्पष्ट है और सरकार यदि चाहे तो उस व्यक्ति की पहचान कर सकती है." परमाणु कार्यक्रम
इस सवाल पर कि उन्होने सरकार में आने के बाद क्या किया, जसवंत सिंह ने कहा कि एनडीए की सरकार आने के बाद सबसे पहले परमाणु परीक्षण किया गया और अमरीकी ख़ुफ़िया एजेंसियों को इसका पता नहीं चला. अमरीका और भारत के बीच हुए परमाणु समझौते और अमरीका में हाल ही में पारित विधेयक पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि देश के परमाणु हित को ख़तरा है. हाल ही में अमरीका की प्रतिनिधि सभा में पारित विधेयक का ज़िक्र करते हुए जसवंत सिंह ने कहा, "भारत ने क़ानूनी बहुपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर करने के बजाय परमाणु परीक्षण पर रोक के लिए द्विपक्षीय समझौते को स्वीकार कर लिया है." जसवंत सिंह ने कहा कि सरकार ने इस मामले में सम्मानजनक व्यवहार नहीं किया. उनका आरोप था कि जसवंत सिंह के साथ सरकार चाहे जो करती लेकिन विपक्ष के नेता होने के नाते उनके साथ मर्यादा का व्यवहार किया जाना चाहिए था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'सारे सवालों के जवाब देने को तैयार हूँ'31 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस चिट्ठी में मुख़बिर का नाम नहीं: पीएमओ30 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'प्रधानमंत्री को पूरी जानकारी भेज दी है'29 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री को नाम बताएँगे जसवंत सिंह24 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'साहस है तो जसवंत मुख़बिर का नाम लें'23 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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