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नेपाल में राजशाही से जुडा विधेयक | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल की सरकार ने एक ऐसे विधेयक का मसौदा तैयार किया है जिसके तरह देश के इतिहास में पहली बार महिलाओं को भी राजसिंहासन संभालने का अधिकार मिल सकेगा. अधिकारियों का कहना है कि विधेयक का मसौदा जल्दी ही संसद में पेश किया जाएगा. नेपाल के संविधान के तहत अभी तक नेपाल नरेश का सबसे बड़ा पुत्र ही उनका उत्तराधिकारी होता है. दो महीने पहले जब नेपाल में प्रतिनिधि सभा का गठन हुआ था तभी घोषणा की गई थी कि नेपाल में राजसिंहासन के उत्तराधिकारी के बारे में नए सिरे से तय किया जाएगा. नया मसौदा तभी क़ानून का रुप ले सकेगा जब प्रतिनिधि सभा इसे पारित करेगी. नए प्रस्तावित क़ानून के तहत सत्तारुढ़ नरेश का पहला बच्चा चाहे वह पुत्र हो या पुत्री, गद्दी का वारिस होगा. विभिन्न लोगों के अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्थाओं का कहना है कि अगर ये क़ानून पारित हो जाता है तो नेपाल के सामाजिक ढांचे में महिलाओं और पुरुषों के बीच भेदभाव एक हद तक समाप्त हो सकेगा. सरकार ने यह भी तय किया है कि शाही परिवार के चुने गए सदस्यों को सरकारी खर्च दिया जाएगा. इन चुने गए सदस्यों में शामिल होंगे राजा, रानी, युवराज, राजकुमारी और राजमाता. इससे पहले राजपरिवार के कई और सदस्यों को सरकारी खर्च दिया जाता था. पिछले कुछ महीनों से नेपाल के राजपरिवार के अधिकारों को सीमित करने के लिए कई तरह के फैसले किए गए हैं. उल्लेखनीय है कि नेपाल में कई बार नरेशों ने अपने विशेष अधिकारों के तहत चुनी गई सरकारों को बर्खास्त किया है. |
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