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दो पूर्व नेपाली मंत्रियों की रिहाई का आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि पूर्व शाही सरकार में मंत्री रहे दो नेताओं - कमल थापा और टंका धाकाल को रिहा किया जाए. कोर्ट ने कहा कि उन्हें हिरासत में रखने का पर्याप्त आधार नहीं है. नेपाल में सात पार्टियों की गठबंधन सरकार ने पूर्व शाही सरकार के पाँच मंत्रियों को लगभग एक महीने पहले हिरासत में लिया था. उन पर आरोप लगाया गया था कि वे जनांदोलन और जनता की प्रभुसत्ता के ख़िलाफ़ षड्यंत्र रच रहे हैं. इसी महीने की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने तीन पूर्व मंत्रियों- रमेश नाथ पांडे, श्रीस शमशेर राना और निक्षय शमशेर राना को रिहा करने का आदेश दिया था. 'सार्वजनिक सुरक्षा क़ानून' नेपाल में सरकार ने पिछले महीने पूर्व शाही सरकार के पाँच मंत्रियों को सार्वजनिक सुरक्षा क़ानून के तहत हिरासत में लिया था. इन मंत्रियों को जिस क़ानून के तहत गिरफ़्तार किया गया था, उसमें बिना मुकदमे के 90 दिन तक हिरासत में रखा जा सकता है. नेपाल नरेश के शासन के दौरान विरोधियों के ख़िलाफ़ इस क़ानून का अकसर इस्तेमाल किया जाता था. नेपाल में कई मानवाधिकार संगठनों ने सार्वजनिक सुरक्षा क़ानून के इस्तेमाल के लिए नेपाल सरकार की निंदा की है. | इससे जुड़ी ख़बरें नेपाल में माओवादियों की बड़ी रैली02 जून, 2006 | भारत और पड़ोस संघर्षविराम की निगरानी पर सहमति26 मई, 2006 | भारत और पड़ोस ऐसा है माओवादी नेता प्रचंड का जीवन24 मई, 2006 | भारत और पड़ोस राजा के अधिकारों में कटौती का प्रस्ताव18 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में कई पूर्व मंत्री गिरफ़्तार12 मई, 2006 | भारत और पड़ोस शांति वार्ता में मदद को तैयार: संयुक्त राष्ट्र08 मई, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में घटनाचक्र: एक नज़र23 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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