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तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ हमले जारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीलंका के पूर्वोत्तर में तमिल विद्रोहियों के ख़िलाफ़ चौथे दिन भी हवाई हमले जारी हैं. ये झड़पें विद्रोहियों और सरकार के बीच जल क्षेत्र को लेकर छिड़े विवाद के कारण हो रही हैं. श्रीलंका सरकार का आरोप है कि तमिल विद्रोहियों ने विवादित जल क्षेत्र को बंद कर दिया है जबकि हज़ारों किसानों का जीवन उस पर निर्भर है. तमिल विद्रोहियों का कहना है कि वे स्थानीय तमिल लोग हैं जो ज़्यादा अधिकारों की माँग कर रहे हैं. पर्यवेक्षक वापस उधर तमिल विद्रोहियों और सरकार के बीच वर्ष 2002 में हुए संघर्षविराम की निगरानी कर रहे डेनमार्क और फ़िनलैंड के पर्यवेक्षकों को वापस बुला लिया गया है. श्रीलंका की सरकार ने डेनमार्क और फ़िनलैंड के फ़ैसले की आलोचना की है. तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई को आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल करने के यूरोपीय संघ के फ़ैसले के बाद एलटीटीई ने माँग की थी कि यूरोपीय देशों के पर्यवेक्षक तमिल बहुल इलाक़ा छोड़ दें. इन पर्यवेक्षकों के चले जाने के बाद पर्यवेक्षकों के गुट की संख्या 60 से घटकर 40 रह जाएगी. | इससे जुड़ी ख़बरें फिनलैंड के 'पर्यवेक्षक श्रीलंका छोड़ेंगे'28 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'विद्रोहियों की हवाई पट्टी पर बमबारी' 27 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस एक अन्य पहलू भी है श्रीलंका का25 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस अहम भूमिका निभाए भारत: राजपक्षे24 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस एलटीटीई ने स्वीडन की अपील ठुकराई21 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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