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शुक्रवार, 28 जुलाई, 2006 को 13:19 GMT तक के समाचार
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बंगाल के मदरसों से 'पाकिस्तान को सबक'
पाकिस्तानी मदरसा
कई जगहों पर मदरसों में लड़कियों और लड़कों को अलग-अलग पढ़ाया जाता है
पाकिस्तान सरकार ने भारतीय राज्य पश्चिम बंगाल के मदरसों में पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम को जानने की इच्छा व्यक्त करते हुए राज्य सरकार को पत्र लिखा है.

राज्य के मदरसों के लिए शिक्षा मंत्री अब्दुल सत्तार ने बीबीसी को बताया कि उन्हें पाकिस्तानी उच्चायोग की ओर से एक पत्र मिला है जिसमें इस तरह की मंशा जाहिर की गई है.

शिक्षा मंत्री ने कहा है कि वे विदेश मंत्रालय के माध्यम से इस पत्र का जवाब भेजेंगे. हालाँकि यह जवाब कब तक भेज दिया जाएगा, इसकी तारीख़ अभी तक तय नहीं हुई है.

उधर दिल्ली स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के एक अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि पाकिस्तान पश्चिम बंगाल के मदरसों और इस्लामिक विद्यालयों के पाठ्यक्रम के बारे में जानने के लिए उत्सुक है.

उन्होंने बताया कि राज्य के मदरसों में पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रम के बारे में जानने का विचार तब आया जब एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि यहाँ के पाठ्यक्रम में कई परिवर्तन किए गए हैं.

इस बाबत पाकिस्तान उच्चायोग में सचिव के पद पर कार्यरत मोहम्मद ख़ालिद जमाली बताते हैं, "हमने पश्चिम बंगाल की सरकार से संपर्क करके मदरसों की कार्यप्रणाली और पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी माँगी है."

वजह

पाकिस्तान में 10 हज़ार से भी ज़्यादा मदरसे हैं पर सवाल यह उठता है कि पश्चिम बंगाल के मदरसों में ऐसा क्या है जो पाकिस्तान को इनके बारे में जानकारी चाहिए.

इसकी वजह यह है कि राज्य के ये मदरसे देश और दुनिया भर में चल रहे मदरसों से कुछ हटकर हैं.

 हमने पश्चिम बंगाल की सरकार से संपर्क करके मदरसों की कार्यप्रणाली और पाठ्यक्रमों के बारे में जानकारी माँगी है
मोहम्मद ख़ालिद जमाली, सचिव- पाकिस्तानी उच्चायोग

जहाँ दुनियाभर के मदरसों में इस्लामिक पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाता है और लड़के-लड़कियों को अलग-अलग पढ़ाने की व्यवस्था देखने को मिलती है वहीं राज्य के मदरसों में लड़कियों और लड़कों को एक साथ पढ़ाया जाता है.

राज्य में 500 से भी ज़्यादा मान्यता प्राप्त मदरसे हैं. इन मदरसों में क़रीब 40 हज़ार हिंदू छात्र भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

ये सभी मदरसे राज्य सरकार की ओर से गठित एक बोर्ड की देखरेख में चलते हैं. यह बोर्ड राज्य सरकार के शिक्षा विभाग की ओर से तय की गई नीतियों के आधार पर काम करता है.

राज्य के मदरसों को यह धर्मनिरपेक्ष रूप वर्ष 1915 में अंग्रेज़ी हुकूमत के समय दिया गया था जब तत्कालीन व्यवस्था में यह तय किया गया कि राज्य के मदरसों में इस्लामिक पाठ्यक्रम के अलावा अंग्रेज़ी भाषा और इतिहास जैसे विषय भी पढ़ाए जाएँगे.

ग़ौरतलब है कि पिछले वर्ष लंदन में हुए बम धमाकों के बाद से पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ मदरसों में सुधार की हिमायत करते नज़र आ रहे हैं.

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