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जामिया में हिंसा की जाँच का आदेश | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत की राजधानी दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया (विश्वविद्यालय) में बुधवार को हुई हिंसा की जाँच की ज़िम्मेदारी सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसके अग्रवाल को सौंपी गई है. पिछले कुछ दिनों से छात्र संघ और विश्वविद्यालय प्रबंधन के बीच कुछ छात्रों के दाख़िले को लेकर अनबन चल रही थी. इसी सिलसिले में मंगलवार को छात्रों का एक दल उपकुलपति मुशीरुल हसन से मिलने पहुँचा. उपकुलपति के मिलने से इनकार करने के बाद छात्र हिंसा पर ऊतारु हो गए. स्थिति गंभीर होती देख उपकुलपति ने विश्वविद्यालय को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है और छात्रों को छात्रावास ख़ाली करने के आदेश दिए गए हैं. जाँच आयोग इस बीच विश्वविद्यालय छात्र संघ ने न्यायाधीश एसके अग्रवाल की अध्यक्षता में एकसदस्यीय जाँच कमेटी गठित करने का विरोध किया है.
छात्र संघ के नेता सत्य प्रकाश मिश्रा ने कहा, "उपकुलपति और प्रॉक्टर रॉकेट इब्राहीम ही छात्र संघ के अध्यक्ष शम्स परवेज़ और दो अन्य छात्रों पर हमले के लिए ज़िम्मेदार हैं. वो कैसे जाँच कराने की घोषणा कर सकते हैं." छात्र संघ उपकुलपति के इस्तीफ़े की माँग कर रहा है. दूसरी ओर उपकुलपति का कहना है कि विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा में बाहरी लड़कों को बुलाया गया था और वे ऐसे उपद्रवी तत्वों के समक्ष घुटने नहीं टेकेंगे. उनका कहना है कि जिन छात्रों के दाखिले के लिए छात्र संघ दबाव बना रहा है वे पहले से ही विश्वविद्यालय की काली सूची में हैं और उनका दाखिला नहीं हो सकता. परिसर में फैले तनाव के मद्देनज़र बड़ी संख्या में पुलिस बल और रैपिड ऐक्शन फ़ोर्स के जवान तैनात किए गए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें उर्दू पर सहयोग बढ़ाने की पहल31 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अंग्रेज़ी नहीं बोलने पर दाखिला नहीं21 जून, 2006 | भारत और पड़ोस एम्स के डॉक्टरों की हड़ताल ख़त्म07 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस फीका रहा संस्थापक दिवस इस बार17 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस कई पहलुओं पर देना होगा ध्यान03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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