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सोमवार, 17 अक्तूबर, 2005 को 17:18 GMT तक के समाचार
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फीका रहा संस्थापक दिवस इस बार

अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय
अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय का सौ साल से भी पुराना इतिहास है
अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय ने इस बार अपने संस्थापक सर सैयद अहमद ख़ाँ की 188वीं वर्षगांठ आधे अधूरे मन से मनाई.

याद रहे कि अलीगढ़ के छात्र विश्व में कहीं भी हों वे अपने इस शैक्षणिक त्यौहार को मनाना नहीं भूलते.

इस उदासीनता का कारण था हाल ही में इलाहाबाद हाइकोर्ट का यह निर्देश कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय (एएमयू) अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय नहीं है इसलिए वह मुसलमानों को आरक्षण नहीं दे सकता.

इसी वजह से विश्वविद्यालय के छात्र संघ ने यह दिन सांकेतिक तौर पर ही मनाने का फ़ैसला किया.

विश्विद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष अब्दुल हफ़ीज़ गांधी ने कहा कि विरोधस्वरूप इस बार संस्थापक सर सैयद अहमद ख़ां की याद में आयोजित होने वाला परंपरागत रात्रि भोज नहीं दिया गया.

सर सैयद अहमद
सर सैयद अहमद ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय की नींव रखी थी

इस का कारण उन्होंने इलाहाबाद हाइकोर्ट के ताज़ा आदेश को बताया है जिस ने 1981 में संसद के एएमयू को अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय का दर्जा दिये जाने को खारिज करार दे कर इस विश्वविद्यालय से मुसलमानों के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण को खतरे में डाल दिया है.

वहीं अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के भूतपूर्व छात्र और भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद साहेब सिंह वर्मा ने कहा कि हम आज के दिन को बड़े आदर के साथ मनाते हैं क्यों कि सर सैयद ने इस संस्थान के ज़रिए हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ाया.

दिल्ली में इस मौक़े पर सर सैयद फ़ाउंडेशन की ओर से जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में सर सैयद मेमोरियल लेक्चर का आयोजन किया गया जिसके वक्ताओं में अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के पूर्व उप-कुलपति सैयद हामिद और जामिया के कुलपति मुशीरुल हसन शामिल थे.

इस अवसर पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के उप-कुलपति नसीम अहमद ने सर सैयद के पदचिन्हों पर चलने और उनके जीवन से प्रेरणा लेने की छात्रों से अपील की.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के इस महोत्सव पर मुख्य अतिथि पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने सर सैयद अहमद को हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय अपने शानदार अतीत के लिए काफी प्रसिद्ध रहा है और उसके अनूठे कल्चर को आज भी बड़े सम्मान से देखा जाता है. अलीगढ़ के रात्रि भोज को वहाँ के छात्र हमेशा याद करते हैं.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय के प्रसिद्ध छात्रों में पुराने ज़माने की अभिनेत्री बेगम पारा, रेणुका देवी, गायक तलत महमूद, गीतकार शकील बदायूँनी, संवाद लेखक राही मासूम रज़ा, जावेद अख़्तर, अभिनेता रहमान और नसीरूद्दीन शाह के अलावा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ज़ाकिर हुसैन, कहानीकार सआदत हसन मंटो, इस्मत चुग़ताई, राजा राव, क्रिकेट खिलाड़ी सीके नायडू, लाला अमरनाथ और हॉकी खिलाड़ी और भारत के पूर्व कप्तान ज़फ़र इक़बाल इत्यादि शामिल हैं.

हर वर्ष अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय 17 अक्टूबर को अपने संस्थापक सर सैयद अहमद खाँ की वर्षगाँठ मनाता है.

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मानव संसाधन मंत्री फ़ातमी कहते हैं कि आरक्षण का फ़ैसला राजनीतिक नहीं था.
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