|
कई पहलुओं पर देना होगा ध्यान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'इस पथ का उद्देश्य नहीं है, शांत भवन में टिक रहना किंतु पहुंचना उस सीमा तक जिसके आगे राह नहीं.' वर्ष 2020 का भारत. एक ऐसा देश जिसने सभी विषमताओं पर विजय प्राप्त कर ली हो. वर्तमान में यह देश जिन परिस्थितियों का सामना कर रहा है, उनसे डटकर मुक़ाबला करने के लिए आवश्यकता है एक सुदृढ़ देश की. देश जिसकी भुजाओं में आतंकवादी हमले से लड़ने की क्षमता हो, ग़रीबी, बेरोज़गारी जिसकी जड़ों को हिला भी न पाए. हर नागरिक अपने देश की समृद्धि की कामना करता है और शायद यही कारण है कि हम नित-प्रतिदिन नए-नए मापदंडों का आविष्कार करते हैं और आशा करते हैं कि हमारा देश उन मापदंडों पर सफल घोषित हो सके. इसी सुधार की कामना रखते हुए हम वर्ष 2020 तक एक समृद्ध, सुदृढ़ और सफल भारत की कल्पना करते हैं. चुनौतियां लेकिन यह सफलता और परिपूर्णता निर्भर करती है राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक स्तंभों पर. मेरी कल्पना में वर्ष 2020 का भारत एक ऐसा देश होगा जिसने अपने इतिहास का निवेश अपने वर्तमान को संवारने में किया होगा. निजीकरण और वैश्वीकरण के युग में हमने अपनी बुनियादी ज़रूरतों को ताक पर रख दिया है. आवश्यकता है कि हम यह ध्यान रखें कि जड़ों को हटाकर, नींव को हटाकर, इमारत नहीं खड़ी हो सकती. राह कठिन है लेकिन जिस देश के नागरिकों में कुछ करने की चाह हो और जो अत्यंत कर्मठ हैं, उनके लिए सत्य ही वर्ष 2020 का भारत, एक जगमगाता भारत होगा. 'जब नाव जल में छोड़ दी | इससे जुड़ी ख़बरें अपेक्षा से अधिक अच्छा रहा यह अनुभव10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस आईआईएमसी में वेब पत्रकारिता कार्यशाला10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस जामिया में ऑनलाइन पत्रकारिता कार्यशाला09 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भोपाल में हुई पत्रकारिता कार्यशाला 08 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस बीबीसी की पत्रकारिता कार्यशाला इंदौर में06 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||