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मनमोहन ने विनिवेश की प्रक्रिया रोकी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सरकारी कंपनियों के विनिवेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि फिलहाल किसी भी सरकारी उपक्रम का विनिवेश नहीं होगा. केंद्र में यूपीए गठबंधन की सरकार है और बताया जा रहा है कि सरकार ने यह फ़ैसला यूपीए के एक घटक दल के यह करने के बाद लिया कि अगर सरकार ने फिलहाल विनिवेश पर रोक नहीं लगाई तो वो केंद्र सरकार से समर्थन वापस ले सकता है. गुरुवार को प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि निजीकरण के सवाल को फिलहाल के लिए स्थगित कर दिया गया है क्योंकि इसपर यूपीए के कुछ घटक दलों को आपत्ति है. इससे पहले इस मसले पर यूपीए के एक घटक दल डीएमके के नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम करुणानिधि ने प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की और उनसे एनएलसी कंपनी के विनिवेश रोकने की माँग रखी. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले महीने एनएलसी यानी नाइवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन और नालको यानी नेशनल एल्युमिनियम कॉर्पोरेशन में सरकार की हिस्सेदारी के 10 प्रतिशत हिस्से को निजी हाथों में सौंपने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी थी. इससे तक़रीबन 2300 करोड़ रूपए से भी ज़्यादा की राशि इकट्ठा होने वाली थी. ग़ौरतलब है कि इनमें से एक कंपनी एनएलसी में काम कर रहे तमिलनाडु राज्य के 45,000 कर्मचारी इस घोषणा के बाद से इस मंगलवार की रात से केंद्र सरकार की निजीकरण की नीति के ख़िलाफ़ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे. | इससे जुड़ी ख़बरें विनिवेश के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पर03 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस खनन कंपनी के विनिवेश का विरोध25 जून, 2006 | भारत और पड़ोस वामपंथी लौटेंगे यूपीए की बैठकों में13 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस विनिवेश में सावधानी की ज़रूरत02 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस नवरत्नों को अधिक स्वायत्तता की घोषणा25 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस विनिवेश को लेकर गतिरोध बरक़रार01 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस भिलाई इस्पात संयंत्र का विनिवेश भी मुद्दा20 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस विनिवेश समझदारी से होः मनमोहन सिंह07 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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