|
अंतरिम सरकार में शामिल होंगे माओवादी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेपाल में माओवादी नेता प्रचंड और प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के बीच हुई बातचीत में यह सहमति हुई है कि माओवादी अंतरिम सरकार में शामिल होंगे. राजधानी काठमांडू में हुई बातचीत के बाद एक संयुक्त बयान जारी हुआ. बयान में कहा गया है कि नेपाल सरकार संसद भंग करने को तैयार हो गई है. संसद भंग करने के बाद अंतरिम सरकार का गठन किया जाएगा. जिसमें माओवादी भी शामिल होंगे. प्रधानमंत्री कोइराला और प्रचंड के बीच हुई ऐतिहासिक बातचीत का उद्देश्य था चुनाव और नए संविधान पर मतभेद ख़त्म करना. बातचीत के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए माओवादी नेता प्रचंड ने कहा कि अंतरिम सरकार का गठन एक महीने के अंदर हो जाएगा. उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला है और इससे देश एक नई दिशा में आगे बढ़ेगा. संविधान अंतरिम सरकार देश के लिए नया स्थायी संविधान बनाएगी. समझौते में यह भी कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र नेपाली सैनिकों और माओवादी विद्रोहियों की निगरानी करे. हालाँकि समझौते में माओवादियों के हथियार डालने का कोई ज़िक्र नहीं है.
इससे पहले गुरुवार को सरकार और माओवादी वार्ताकारों के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता में यह तय हुआ था कि संयुक्त राष्ट्र की सहायता से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और शांति के लिए काम कर रहे लोगों की एक निगरानी समिति बनाई जाएगी. पहले दौर की शांति वार्ता में संघर्ष ख़त्म करने पर सहमति हुई थी. दशकों बाद माओवादी नेता प्रचंड पहली बार खुले रूप में राजधानी काठमांडू पहुँचे. नेपाल में प्रचंड और प्रधानमंत्री कोइराला के बीच बातचीत को लेकर काफ़ी उत्साह था. प्रचंड सरकारी हेलिकॉप्टर में काठमांडू आए. कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उन्हें प्रधानमंत्री गिरिजा प्रसाद कोइराला के सरकारी निवास पर ले जाया गया. बाद में राजनीतिक दलों के प्रमुख भी बातचीत में हिस्सा लेने पहुँचे. राजशाही के ख़िलाफ़ लंबे समय तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद नेपाल नरेश ज्ञानेंद्र ने राजनीतिक पार्टियों को सत्ता सौंप दी थी जिसके बाद गिरिजा प्रसाद कोइराला को प्रधानमंत्री बनाया गया था. नई सरकार के आने के बाद से ही माओवादियों और सरकार के बीच बातचीत का रास्ता साफ़ हो गया था. | इससे जुड़ी ख़बरें 'विद्रोहियों के साथ बातचीत में टालमटोल'22 मई, 2006 | भारत और पड़ोस अपूर्ण है संसद का प्रस्ताव: प्रचंड19 मई, 2006 | भारत और पड़ोस राजा के अधिकारों में कटौती का प्रस्ताव18 मई, 2006 | भारत और पड़ोस आसान नहीं है नेपाल में लोकतंत्र की राह27 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस माओवादियों ने किया संघर्षविराम26 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री पद के लिए कोइराला चुने गए25 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नरेश ने संसद बहाल करने की घोषणा की24 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस नेपाल में घटनाचक्र: एक नज़र23 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||