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शुक्रवार, 26 मई, 2006 को 11:51 GMT तक के समाचार
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क्या है सर क्रीक विवाद?
भारत-पाकिस्तान के ध्वज
भारत और पाकिस्तान के बीच समेकित बातचीत के आठ मुद्दों में सर क्रीक भी एक विषय है
भारत और पाकिस्तान सर क्रीक विवाद पर बातचीत दोनों देशों के बीच व्यापक शांति प्रक्रिया का ही एक हिस्सा है.

शुक्रवार को समाप्त हुई दो दिन की बातचीत में भारत का प्रतिनिधित्व सर्वेयर जनरल एम गोपाल राव और पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त रक्षा सचिव एडमिरल एहसानुल हक़ चौधरी ने किया.

इस दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्ष सर क्रीक क्षेत्र में संयुक्त सर्वेक्षण कराने पर सहमत हुए.

मई 2005 में इस्लामाबाद में दो दिन की बातचीत हुई थी जिसमें कोई नतीजा नहीं निकल सका था.

साल 2005 में सर क्रीक क्षेत्र का एक संयुक्त सर्वेक्षण किया गया था जिसमें क़रीब 80 साल पहले कच्छ और सिंध के अधिकारियों के लगाए हुए सीमा स्तंभों की पहचान करने की कोशिश की गई थी.

इस इलाक़े का सामरिक महत्व कोई ख़ास नहीं है और इसके पास कोई बड़ी आबादी नहीं है लेकिन दोनों ही देश इसे अपने क़ब्ज़े में रखना चाहते हैं.

इस क्षेत्र को तेल और प्राकृतिक गैस से समृद्ध माना जाता है और अगर दोनों देशों को इस विवाद पर कोई समझौता जल्दी ही करना होगा क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की निर्धारित की हुई समय सीमा नज़दीक आ रही है.

भारत और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की समुद्री क़ानून पर संधि के सदस्य हैं और इस संधि में कहा गया है कि सभी देशों के समुद्री विवाद 2009 तक सुलझा लेने चाहिए अन्यथा विवादित क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र घोषित कर दिया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र ने संबंधित देशों को अपने-अपने दावे 2007 तक पेश करने के लिए कहा है.

सर क्रीक विवाद

सर क्रीक मामले पर विवाद 1960 के दशक में शुरू हुआ था. इस विवाद को हल करने के लिए दोनों देशों के बीच आठ दौर की बातचीत हो चुकी है.

सर क्रीक विवाद दरअसल 60 किलोमीटर लंबी दलदली ज़मीन का विवाद है जो भारतीय राज्य गुजरात और पाकिस्तान के राज्य सिंध के बीच स्थित है.

सर क्रीक पानी के कटाव के कारण बना है और यहाँ ज्वार भाटे के कारण यह तय नहीं होता कि कितने हिस्से में पानी रहेगा और कितने में नहीं.

दूसरे शब्दों में सर क्रीक दोनों देशों के बीच अस्थिर सी सीमा है.

इस कारण दोनों देशों के मछुआरों के लिए अच्छी-ख़ासी मुसीबत बनी हुई है जो असावधानी से सीमा उल्लंघन कर बैठते हैं.

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