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हैदराबाद पुलिस के ख़िलाफ़ आक्रोश

हैदराबाद
इस घटना को लेकर हैदराबाद में काफ़ी तनाव रहा.
यूँ तो भारत में नागरिकों के साथ पुलिस की ज़्यादतियों, दुर्व्यवहार और ताक़त का ग़लत इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है लेकिन इस बार आंध्र प्रदेश की राजधानी हैदराबाद में जो कुछ हुआ उसने इन सब बातों के आदी लोगों को भी भड़का दिया.

दोपहिया वाहनों के चालकों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने के निर्णय को लागू करने में पुलिस ने इतने उत्साह का प्रदर्शन किया कि इस नियम को लागू कराने में अमानवीय रवैया अपनाने से भी नहीं चूके और दो युवकों को अपनी जान गँवानी पड़ी.

इस घटना के बाद पूरे हैदराबाद में लोगों के बीच पुलिस की ज़्यादतियों के ख़िलाफ़ काफ़ी रोष व्याप्त है.

लोगों ने इसके विरोध में कई प्रदर्शन किए और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया वहीं पुलिसवालों ने भी लोगों पर लाठीचार्ज किया है. हालात नियंत्रित करने के लिए शहर के कुछ हिस्से में रैपिड एक्शन फ़ोर्स को फ़्लैग मार्च करना पड़ा.

घटना

हुआ यह कि हैदराबाद की एक भीड़-भाड़ वाली मुख्य सड़क ख़ैरियताबाद पर गत रविवार की शाम नियमित तलाशी लेने में लगी ट्रेफ़िक पुलिस के जवानों ने हेलमेट के बिना गाड़ी चलाने वाले एक युवक को रोकने की कोशिश की.

जब वह नहीं रुका तो एक पुलिस कॉंस्टेबल ने उस पर लाठी फेंक कर मारी.

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि जैसे ही उस युवक को लाठी लगी वह मोटर साइकिल पर नियंत्रण खो बैठा और तेज़ी से जाने वाली उसकी मोटर साईकिल रोड डिवाइडर से टकरा गई.

मोटर साइकिल चालक और उसके पीछे बैठा युवक दोनों बुरी तरह से घायल हो गए.

घायलों को अस्पताल ले जाया गया जहाँ घायल मोटर साइकिल चालक 27 वर्षीय सैय्यद मोहम्मद शरीफ़ की मृत्यु हो गई.

 हम पुलिस के व्यवहार से बहुत नाराज़ और निराश हैं. नगर में सट्टेख़ाने और जुएख़ाने चल रहे हैं. हर तरह के अपराध और डकैतियाँ हो रही हैं, ये उसे नहीं रोक सकते लेकिन पैसे वसूल करने के लिए ये आम नागरिकों की जान ले रहे हैं
असदुद्दीन ओवैसी, सांसद-हैदराबाद

इस घटना ने पूरे हैदराबाद शहर को हिलाकर रख दिया और विशेषकर हैदराबाद के संवेदनशील पुराने शहर में जहाँ यह युवक रहता था, स्थिति तनावपुर्ण हो गई.

दूसरे दिन उस युवक के जनाज़े के जुलूस में हिंसा भड़क उठी. क्रोधित भीड़ ने पुलिसवालों पर जमकर पथराव किया और पुलिस वालों ने प्रदर्शनकारियों पर लाठी चार्ज किया. दोनों ही धटनाओं में कई लोग घायल हो गए.

बेपरवाह लाठी

हैदराबाद में जब से हेलमेट का नियम लागू किया गया है तभी से पुलिस की ओर से वाहन चालकों के साथ ज़्यादतियों, मार-पीट और घूस लेने की घटनाओं का सिलसिला चल रहा है.

अप्रैल में ही एक युवक रेहान रिज़वी की एक आँख उस वक़्त चली गई जब एक पुलिस कॉंस्टेबल ने उसकी गाड़ी रोकने के लिए उसके मुँह पर लाठी चला दी.

तभी से आम नागरिक पुलिस पर भड़के हुए थे और रही सही क़सर इस घटना ने पूरी कर दी.

हैदराबाद के प्रभावशाली मुस्लिम राजनीतिक दल, मजलिसे-इत्तेहादुल-मुस्लेमीन ने इस विषय पर आंदोलन छेड़ दिया है.

हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, "हम पुलिस के व्यवहार से बहुत नाराज़ और निराश हैं. नगर में सट्टेख़ाने और जुएख़ाने चल रहे हैं. हर तरह के अपराध और डकैतियाँ हो रही हैं, ये उसे नहीं रोक सकते लेकिन पैसे वसूल करने के लिए ये आम नागरिकों की जान ले रहे हैं."

कार्रवाई

हिंसात्मक प्रदर्शन और जनता के दबाव की वजह से सरकार ने इस घटना के लिए ज़िम्मेदार पुलिसकर्मियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का आदेश दिया है.

छह पुलिसकर्मियों को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया गया है. एक सब-इंस्पेक्टर यादगिरि स्वामी और कॉंस्टेबल भास्कर के विरुद्ध एक व्यक्ति की मौत का कारण बनने का मामला दर्ज किया गया है.

पुलिस
पुलिस महकमे पर अमानवीयता के आरोप लगते रहे हैं.

मुख्यमंत्री राजशेखर रेड्डी ने मृतक के परिवार को दो लाख रुपए का मुआवज़ा और नौकरी देने और घायल व्यक्ति के इलाज का ख़र्च उठाने की घोषणा की है.

राज्य के मानवाधिकार आयोग ने युवक की मौत पर और एक युवक की आँख फोड़ देने की धटनाओं पर पुलिस को नोटिस देकर जवाब मांगा है.

लेकिन पुलिस अधिकारी इससे ख़ुश नहीं हैं. नगर पुलिस आयुक्त एके मोहंती ने पुलिसवालों का बचाव करते हुए कहा है कि ट्रेफ़िक पुलिस पर लाठी चलाने का आरोप ग़लत है क्योंकि उनके पास लाठी नहीं होती है.

ग़ौरतलब है कि गत वर्ष हैदराबाद में सड़क दुर्घटनाओं में 1300 से अधिक मृत्यु हुई थी और मरने वाले अधिकतर पैदल चलने वाले लोग या दो-पहिया वाहन पर सवारी करने वाले लोग थे.

पुलिस का कहना था कि जब से हेलमेट का क़ानून लागू हुआ है सड़क दुर्घटनाओं में कम मौतें हुई हैं.

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