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करुणानिधि सरकार बनाने का दावा करेंगे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तमिलनाडु में मतदाताओं ने एक बार फिर उलटफेर करते हुए सत्तारुढ़ एआईएडीएमके को बाहर कर दिया है और उसकी प्रतिद्वंदी डीएमके को सत्ता सौंप दी है. डीएमके नेता करुणानिधि शुक्रवार को सरकार बनाने का दावा पेश करने जा रहे हैं. हालांकि डीएमके के पास अपना बहुमत नहीं है और उसे सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों की ज़रुरत होगी. पीएमके और वामपंथी दलों ने डीएमके को बाहर से समर्थन देने का वादा किया है. संभावना है कि वे शनिवार 13 मई को शपथ ग्रहण करेंगे. 234 सीटों वाली विधानसभा में जयललिता की पार्टी एआईडीएमके और उनके सहयोगी दलों को सिर्फ़ 71 सीटें मिली हैं. जबकि डीएमके और सहयोगी दलों को 163 सीटों पर जीत हासिल हुई है. एक सीट अन्य के खाते में गई है. अपनी हार स्वीकार करते हुए जयललिता ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. डीएमके सरकार को पीएमके और वामपंथी दलों ने बाहर से समर्थन देने का आश्वासन दिया है. डीएमके की अपनी 96 सीटें हैं जबकि पीएमके की 18, सीपीएम की 9 और सीपीआई की 6 सीटें हैं. इस तरह डीएमके को सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 विधायकों का जादुई नंबर आसानी से हासिल हो गया है. गठबंधन निवर्तमान विधान सभा में अन्नाद्रमुक के 132 सदस्य थे. चुनाव नतीजों से स्पष्ट हुआ है कि राज्य में एक गठबंधन सरकार बनेगी जिससे एकदलीय सरकार का लंबा इतिहास समाप्त हो जाएगा.
केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के लिए भी तमिलनाडु के चुनावी नतीजे अच्छे रहे हैं. कांग्रेस ने वहाँ 34 सीटों पर जीत हासिल की है और वह द्रमुक गठबंधन की प्रमुख पार्टी है. संभावना जताई जा रही है कि कांग्रेस भी द्रमुक गठबंधन सरकार में शामिल होगी और अगर ऐसा होता है तो 1967 के बाद से यह पहला मौक़ा होगा जब तमिलनाडु में कांग्रेस सत्ता में शामिल होगी. 83 वर्षीय करुणानिधि ने लगातार 11वीं बार विधान सभा चुनाव जीतकर एक नया इतिहास बनाया है. वे गठबंधन के मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं और यह भी एक नया रिकॉर्ड होगा यानी वह रिकॉर्ड पाँचवीं बार राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे. लुभावने वादे हालांकि चुनावी गणित में माहिर जयललिता ने ऐन मौके पर एमडीएमके नेता वाइको को अपने पाले में लाकर अन्नाद्रमुक की संभावनाओं को मज़बूत बनाने की कोशिश की थी. वाइको ने द्रमुक पर सीटों के बंटवारे में मनमानी करने का आरोप लगाते हुए अम्मा से हाथ मिला लिया था पर इसका कोई लाभ मिला, परिणामों को देखते हुए यह कह पाना कठिन ही है. उधर चुनाव से पहले ही भाजपा ने भी जयललिता से पल्ला झाड़ लिया था. द्रमुक गठबंधन में शामिल कांग्रेस ने केन्द्र सरकार की नीतियों को प्रचारित कर यह बताया कि तमिलनाडु के विकास के लिए योजनाओं की कमी नही है लेकिन राज्य सरकार इन्हें लागू करने में विफल रही है. विपक्षी द्रमुक गठबंधन ने राज्य सरकार पर विनाशकारी सुनामी से हुए नुक़सान और किसानों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देने का आरोप लगाते हुए जनता से उन्हें समर्थन देने की अपील की. हालांकि दोनों गठबंधनों की ओर से लोक लुभावन चुनावी वायदों की झड़ी लगी. जयललिता ने जहां दोबारा सत्ता में आने पर मुफ़्त रंगीन टेलीविजन सेट बांटने का ऐलान किया वहीं द्रमुक ने मात्र दो रुपये किलो चावल और गेहूं देने का वायदा किया था. | इससे जुड़ी ख़बरें कांग्रेस को गठबंधन बनाना होगा असम में11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस सोनिया के प्रतिद्वंद्वियों की ज़मानत ज़ब्त11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस यूपीए पर वामपंथी दलों का दबाव बढ़ेगा11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस न कोई विरोध न नाराज़गी11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस पश्चिम बंगाल और केरल में वामदलों की जीत11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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