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पश्चिम बंगाल, केरल में वाम मोर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
केरल और पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में वामपंथी दलों को भारी जीत मिली है. पश्चिम बंगाल में लगातार सातवीं बार जीतकर वामदलों ने एक इतिहास बनाया है. जबकि तमिलनाडु में जयललिता को भारी झटका लगा है और द्रमुक-कांग्रेस गठजोड़ को सफलता मिली है. असम में कांग्रेस को जीत तो मिली है लेकिन सरकार बनाने के लिए उसे सहयोगी दलों का सहारा लेना पड़ेगा. इसी तरह पांडिचेरी में भी सहयोगी दलों के साथ कांग्रेस सरकार बनाने की स्थिति में दिख रही है. इसके अलावा रायबरेली लोकसभा के उपचुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने चार लाख 17 हज़ार वोटों से जीत दर्ज कर सभी प्रतिद्वंद्वियों की ज़मानत जब्त करवा दी है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अभी तक के चुनाव परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि यह यूपीए गठबंधन और धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जीत है. उन्होंने बुद्धदेव भट्टाचार्य, करुणानिधि और तरुण गोगोई को फ़ोन पर बधाई दी है. पाँच राज्यों में हुए चुनावों के बाद गुरुवार को मतों की गिनती हुई. वामदलों की जीत पश्चिम बंगाल में विधानसभा 293 सीटों में से की वाम मोर्चे को 232 सीटें मिली हैं, तृणमूल कांग्रेस गठजोड़ को 30 सीटें मिली हैं जबकि कांग्रेस को 21 और अन्य को 10 सीटों पर सफलता मिली है.
वहाँ तीन दशकों से शासन कर रहे वामदलों की ये लगातार सातवीं जीत है. वामपंथी दलों के नेताओं ने कहा है कि ये उनकी नीतियों की जीत है. उधर केरल में कांग्रेस गठबंधन (यूडीएफ़) को सत्ता से बाहर करते हुए वामपंथी दलों के गठबंधन (एलडीएफ़) ने पाँच साल बाद सत्ता में लौटने की राज्य की परंपरा को क़ायम रखा है. वहाँ 140 सीटों में से 95 सीटों पर एलडीएफ़ को जीत मिली है जबकि यूडीएफ़ 43 सीटों पर सिमट गई है. दो सीटें अन्य के खाते में गई हैं. जयललिता का इस्तीफ़ा तमिलनाडु में मतदाताओं को तरह तरह के प्रलोभन देने के खेल में आख़िर जयललिता मात खा गईं और उनकी पार्टी का एक तरह से सफाया हो गया है.
234 सीटों वाली विधानसभा में जयललिता की पार्टी एआईडीएमके और उनके सहयोगी दलों को सिर्फ़ 71 सीटें मिली हैं. जबकि डीएमके और सहयोगी दलों को 163 सीटों पर जीत हासिल हुई है. एक सीट अन्य के खाते में गई है. अपनी हार स्वीकार करते हुए जयललिता ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. जबकि डीएमके की ओर से अपने सहयोगी दलों के साथ सरकार बनाने के लिए करुणानिधि शुक्रवार को दावा पेश करने वाले हैं. डीएमके सरकार को पीएमके और वामपंथी दलों ने बाहर से समर्थन देने का आश्वासन दिया है. डीएमके की अपनी 96 सीटें हैं जबकि पीएमके की 18, सीपीएम की 9 और सीपीआई की 6 सीटें हैं. इस तरह डीएमके को सरकार बनाने के लिए आवश्यक 118 विधायकों का जादुई नंबर आसानी से हासिल हो गया है. संभावना है कि कांग्रेस अपनी 34 सीटों के साथ सरकार में शामिल हो सकती है. अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस लंबे समय के बाद तमिलनाडु में सत्ता में होगी. भले ही गठबंधन के रास्ते हो. इस तरह 83 वर्षीय करुणानिधि पाँचवी बार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. ख़बरें हैं कि डीएमके कांग्रेस की सरकार को पांडिचेरी में बाहर से समर्थन देने को राज़ी है. वहाँ 30 सीटों में से 12 पर डीएमके, 13 पर कांग्रेस और तीन सीटों पर एआईडीएमके को जीत मिली है. दो सीटों पर अन्य दल विजयी हुए हैं. असम में गठबंधन सरकार कुल 126 सीटों वाली असम विधानसभा में कांग्रेस को 55 सीटों पर जीत हासिल हुई है. जबकि असम गण परिषद को सिर्फ़ 26 सीटें ही मिल सकी हैं. अन्य के खाते में 45 सीटें जा रही हैं. इस तरह वहाँ कांग्रेस को अपनी सरकार बनाने के लिए सहयोगी दलों का सहारा लेना पड़ेगा. असम में अब तक मुख्यमंत्री का पद संभाल रहे तरुण गोगोई ने विश्वास व्यक्त किया है कि वहाँ कांग्रेस को ज़रुरी समर्थन आसानी से मिल जाएगा. उन्होंने कहा, "हमें बोडो पार्टी का समर्थन मिल जाएगा और हम एक स्थिर गठबंधन सरकार देंगे." कांग्रेस आलाकमान ने महासचिव दिग्विजय सिंह और मोहसिना किदवई को असम भेजा है. पिछली बार वहाँ कांग्रेस ने 71 सीटें जीतकर अपने ही दम पर सरकार बनाई थी. रायबरेली की जीत लाभ के पद पर विवाद के बाद जब सोनिया गाँधी ने लोकसभा से इस्तीफ़ा देकर रायबरेली से उपचुनाव लड़ने का फ़ैसला किया था तब भी किसी को शक नहीं था कि वहाँ से उनकी जीत नहीं होगी. चर्चा सिर्फ़ ये ही होती रही कि उनकी जीत का अंतर कितना होगा.
और गुरुवार को चुनाव परिणाम आए तो पता चला कि भाजपा के तेज़तर्रार नेता विनय कटियार सहित सभी प्रतिद्वंद्वी अपनी ज़मानत गँवा चुके हैं. सोनिया गाँधी ने अब तक की सबसे बड़ी जीत हासिल की और इस बार उनकी जीत का अंतर चार लाख 17 हज़ार रहा. उनकी बेटी प्रियंका गाँधी ने इस जीत के लिए रायबरेली की जनता को धन्यवाद दिया है. जबकि इसकी ख़बर आते ही सोनिया गाँधी के निवास के सामने कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भीड़ जमा हो गई. अजीत जोगी सहित कई कांग्रेस सांसदों ने सोनिया गाँधी से प्रधानमंत्री का पद संभालने का आग्रह भी किया है लेकिन ऐसी संभावना से सोनिया गाँधी ने इंकार किया है. उन्होंने संकेत दिए हैं कि चुनाव प्रचार की कमान संभालने वाले राहुल गाँधी को आने वाले दिनों में और ज़िम्मेदारियाँ दी जा सकती हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें न कोई विरोध न नाराज़गी11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस सोनिया के प्रतिद्वंद्वियों की ज़मानत ज़ब्त11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस करुणानिधि की वापसी का रास्ता साफ़11 मई, 2006 | भारत और पड़ोस तमिलनाडु में 65 फीसदी मतदान08 मई, 2006 | भारत और पड़ोस तीन राज्यों में मतदान ख़त्म08 मई, 2006 | भारत और पड़ोस केरल में दूसरे चरण में 70 फ़ीसदी मतदान28 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस तीसरे चरण में 71 प्रतिशत मतदान26 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस केरल में विकास है चुनावी मुद्दा21 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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