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एक उम्मीदवार ऐसा भी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य की चुनावी सरगर्मी में लोग एक उम्मीदवार को कौतूहलवश देखने आ रहे हैं. ये उम्मीदवार है कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन की बेवा मुत्तुलक्ष्मी जो पेन्नाग्राम विधानसभा क्षेत्र से चुनावी मैदान में हैं. वीरप्पन को 15 साल के गहन तलाशी अभियान के बाद दो साल पहले पुलिस ने मार दिया था. मुत्तुलक्ष्मी अब वीरप्पन के नाम पर ही वोट मांग रही हैं और उनका कहना है कि जिस तरह वीरप्पन ग़रीबों और आदिवासी लोगों के लिए काम करते थे वैसा ही काम वो भी करेंगी. यादों के सहारे मुत्तुलक्ष्मी की चुनावी सभाओं में उनका साथ देती हैं उनकी दोनों बच्चियां जो हाईस्कूल में पढ़ती हैं. जंगमायनूर गांव के लोग बताते हैं कि मुत्तुलक्ष्मी को देखकर वीरप्पन की याद ताज़ा हो जाती है जिन पर 120 से अधिक हत्या के मामले थे. वीरप्पन से जितना पुलिसवाले डरते थे उतना ही कुछ गांवों में वीरप्पन लोकप्रिय भी थे. इस विधानसभा क्षेत्र में कई लोग मुत्तुलक्ष्मी को पहचान लेते हैं. जो नहीं पहचान पाते उनसे बस इतना कहा जाता है. ये उसकी पत्नी है जिसकी बड़ी बड़ी मूंछें थीं. ग़रीबों को मदद
घनी और बड़ी बड़ी मूंछों वाले वीरप्पन का चेहरा पूरे देश भर में लोगों को अब भी याद है. मुत्तूलक्ष्मी चुनावी अभियान के दौरान हाथ जोड़कर लोगों से वोट की अपील करती है और कहती है " मुझे मौका दीजिए. वीरप्पन ने ग़रीबों और आदिवासियों के लिए काम किया. मैं आपके अधिकारों के लिए लड़ूंगी." हालांकि क्षेत्र में कम ही लोग मानते हैं कि मुत्तूलक्ष्मी जीत सकती है क्योंकि उनके ख़िलाफ दो बड़े दलों के उम्मीदवार मैदान में है. फिर मुत्तुलक्ष्मी को देखने भीड़ क्यों जुटती है. लोग कहते हैं कि कई तो बस कौतूहलवश मुत्तुलक्ष्मी को देखने आ जाते हैं. महिलाओं में मुत्तुलक्ष्मी के प्रति सहानुभूति देखी जा सकती है लेकिन ये कितने वोटों में तब्दील होगी ये बताना मुश्किल है. उल्लेखनीय है कि वीरप्पन भी राजनीति में आना चाहते थे और एक बार उन्होंने राज्य सरकार के समक्ष ये शर्त भी रखी थी अगर उनके ख़िलाफ़ सारे मामले वापल ले लिए जाएं तो वह आत्मसमर्पण को तैयार हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें 'वीरप्पन ने समर्पण की पेशकश की थी'20 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस राजनीतिक संबंधों की जाँच होगी20 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस वीरप्पन के ख़ज़ाने की खोज22 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस भीड़ जुट रही है वीरप्पन की क़ब्र पर04 नवंबर, 2004 | भारत और पड़ोस वीरप्पन की कब्र पर पहुँचते हैं लोग17 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस आख़िरकार वीरप्पन मारा गया22 दिसंबर, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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