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बुधवार, 20 अक्तूबर, 2004 को 23:11 GMT तक के समाचार
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'वीरप्पन ने समर्पण की पेशकश की थी'
मुथुलक्ष्मी
मुथुलक्ष्मी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उन्हें प्रताड़ित किया है
कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन की पत्नी ने कहा है कि उनके पति ने तीन साल पहले आत्मसमर्पण की पेशकश की थी लेकिन अधिकारियों ने इसे ठुकरा दिया था.

बीबीसी तमिल सेवा के संपत कुमार के साथ विशेष इंटरव्यू में मुथुलक्ष्मी ने कहा कि पिछले 10 सालों में उन्हें अपने पति से सिर्फ़ दो बार ही मिलने का मौक़ा मिला.

अपने पति को दफ़नाए जाने के बाद मुथुलक्ष्मी ने इस विशेष इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने आख़िरी बार वीरप्पन को वर्ष 2001 में देखा था.

मुथुलक्ष्मी ने बताया कि उसी साल वीरप्पन ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को भेजे एक वीडियो टेप में हथियार डालने की पेशकश की थी. उन्होंने बताया कि वीरप्पन जेल जाने को तैयार थे लेकिन जीवन भर के लिए नहीं.


इसी सोमवार को तमिलनाडु पुलिस के स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ) ने एक मुठभेड़ में वीरप्पन और उनके तीन साथियों को मार गिराया था.

वीरप्पन की 100 से ज़्यादा हत्या के मामलों में तलाश थी और पुलिस 60 के दशक से ही उनके पीछे लगी थी.

वीडियो

वीरप्पन की पत्नी मुथुलक्ष्मी ने बीबीसी तमिल के साथ बातचीत में जिस वीडियो का उल्लेख किया, अधिकारियों ने उसके बारे में कभी भी जानकारी नहीं दी.

 वीरप्पन अपने परिवार के साथ कम से कम 10 साल बिताना चाहते थे. क्योंकि वे पहले से ही 53 साल के हो चुके थे और उन्हें जेल में बंद करने का मतलब था कि उनकी बाक़ी ज़िंदगी फिर जेल में ही गुजरती
मुथुलक्ष्मी

मुथुलक्ष्मी का कहना है कि आत्मसमर्पण की पेशकश वाला वीडियो वीरप्पन ने अपने भतीजे के माध्यम से मुख्यमंत्री जयलिलता को भेजा था. वीरप्पन के भतीजे मद्रास हाई कोर्ट में वकील हैं.

बीबीसी तमिल के साथ बातचीत में मुथुलक्ष्मी ने बताया कि मुख्यमंत्री ने वीरप्पन के प्रस्ताव की अनदेखी की.

उन्होंने बताया कि उनके पति ने वीडियो में यह स्पष्ट कर दिया था कि अगर अधिकारी उन्हें आजीवन जेल में बंद करने की सोच रहे हैं तो वे जंगल में ही रहना पसंद करेंगे.


मुथुलक्ष्मी ने बताया, "वीरप्पन अपने परिवार के साथ कम से कम 10 साल बिताना चाहते थे. क्योंकि वे पहले से ही 53 साल के हो चुके थे और उन्हें जेल में बंद करने का मतलब था कि उनकी बाक़ी ज़िंदगी फिर जेल में ही गुजरती."

'अच्छाई'

वीरप्पन की पत्नी मुथुलक्ष्मी को कभी-कभार ही अपने पति को देखने का मौक़ा मिलता था. इसके बावजूद मुथुलक्ष्मी का कहना है कि वीरप्पन एक 'प्यारे पिता' और 'अच्छे पति' थे.

उन्होंने बताया, "वीरप्पन ने कभी भी मुझे या अपने बच्चों को नहीं मारा-पीटा." मुथुलक्ष्मी को यह भी पता था कि उनके समर्थक उन्हें 'रॉबिनहुड' मानते थे.

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मुथुलक्ष्मी का कहना है कि वीरप्पन अच्छे पिता और पति थे

हालाँकि सच ये भी है कि वीरप्पन के गैंग वाले किसी भी मुखबिर से निर्दयता से पेश आते थे.

जब मुथुलक्ष्मी से यह पूछा गया कि एक ऐसे व्यक्ति से उन्होंने शादी क्यों की जिनकी पुलिस को तलाश थी, मुथुलक्ष्मी ने बताया कि 1990 में जब उनकी वीरप्पन से शादी हुई तो उनके ख़िलाफ़ सिर्फ़ शिकार और तस्करी के मामले दर्ज थे.

उन्होंने बताया कि शादी के बाद उनके ख़िलाफ़ अपहरण और कथित हत्याओं के मामले सामने आए.

मुथुलक्ष्मी ने बताया कि उन्होंने कई बार वीरप्पन से विनती की थी कि वे अपनी अपराध की ज़िंदगी छोड़ दें.

उन्होंने कहा, "मेरी विनती पर वीरप्पन सिर्फ़ इतना कहते थे कि धीरज धरो समय आने पर मैं ज़रूरी क़दम उठाऊँगा."

मुथुलक्ष्मी ने बताया कि वीरप्पन ने बच्चों की ख़ातिर उन्हें अपने साथ जंगल में रहने से मना किया था.

पुलिस के साये में ज़िंदगी

बीबीसी तमिल के साथ ख़ास बातचीत में मुथुलक्ष्मी ने बताया कि कैसे उन्हें पुलिस के साये में अपनी ज़िंदगी बितानी पड़ती थी.

 पुलिस हमारे फ़ोन कॉल टेप करती थी और वीडियो कैमरे में हमारी हर गतिविधि क़ैद होती थी. 1992 में जब पुलिस ने मुझे दो साल तक हिरासत में रखा तो मुझे तरह-तरह की प्रताड़ना दी गई. बिजली के झटके दिए गए, शौचालय नहीं जाने दिया जाता था, खाना ख़राब मिलता था और उस पर से मारपीट अलग थी
मुथुलक्ष्मी

मुथुलक्ष्मी ने बताया कि पिछले 10 सालों में वीरप्पन को तलाश कर रही एसटीएफ की निगरानी में उन्हें समय गुजारना पड़ता था.

उन्होंने बताया, "पुलिस हमारे फ़ोन कॉल टेप करती थी और वीडियो कैमरे में हमारी हर गतिविधि क़ैद होती थी."

मुथुलक्ष्मी को पुलिस ने 1992 में हिरासत में भी लिया था. दो साल तक पुलिस हिरासत में रहीं मुथुलक्ष्मी ने बताया कि पुलिस ने उन्हें काफ़ी प्रताड़ित किया.

उन्होंने बताया कि पुलिस उन्हें बिजली का झटका देती थी, उन्हें शौचालय भी नहीं जाने दिया जाता था और खाना भी बहुत ख़राब मिलता था उस पर से पुलिस की मारपीट अलग थी.

पुलिस ने मुथुलक्ष्मी के प्रताड़ित किए जाने के दावे पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है.

लेकिन कथित वीरप्पन समर्थकों के ख़िलाफ़ सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकार हनन के कई आरोप लगे हैं.

'कैसे कटेगी ज़िंदगी'

1996 में मद्रास हाई कोर्ट ने कई महिलाओं को मुआवज़ा देने का आदेश दिया था. केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई ने भी यह पाया था कि इन महिलाओं के साथ सुरक्षा बलों ने बलात्कार किया.

तमिलनाडु के पूर्व पुलिस महानिदेशक वॉल्टर दवाराम कहते हैं कि वीरप्पन की तलाश कर रहे सुरक्षा बलों ने मानवाधिकार की कम ही परवाह की.

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वीरप्पन को मारने की ख़ुशी मानते एसटीएफ के सदस्य लेकिन उन पर कई आरोप हैं

उन्होंने बीबीसी तमिल सेवा को बताया, "हमारी चिंता जंगलों की रक्षा करनी थी. हमारी चिंता थी जानवरों की हिफ़ाज़त और लोगों को सुरक्षा प्रदान करना."

अपने पति के मारे जाने के बाद मुथुलक्ष्मी को अपनी दोनों बेटियों की भविष्य की चिंता भी सता रही है.

मुथुलक्ष्मी ने कहा कि उनके पास पैसे भी कम है और उन्हें कोई नौकरी भी नहीं देगा.

उन्होंने कहा, "मेरे बच्चों की शिक्षा पर भी असर पड़ा था क्योंकि पुलिस उन्हें शांति से पढ़ने भी नहीं देती थी. पुलिस अधिकारी ये समझते थे कि वीरप्पन को पकड़ने के लिए वे मेरे बच्चों का इस्तेमाल कर सकते हैं."

मुथुलक्ष्मी ने कहा कि 10 साल कर एसटीएफ के साये में रहने से उनकी ज़िंदगी तबाह हो गई और उन्होंने उन्हें कोई काम भी नहीं करने दिया.

उन्होंने कहा कि अब यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह उनके बच्चों की देखरेख करे.

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