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कब क्या किया वीरप्पन ने | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन का आपराधिक जीवन क़रीब तीन दशक लंबा चला जिस दौरान उन्होंने 150 से भी ज़्यादा लोगों की हत्या की जिनमें कई पुलिस और वन अधिकारी शामिल थे. तमिलनाडु और कर्नाटक की सीमा से लगने वाले जंगलों पर राज करने वाले वीरप्पन ने दाँतों के लिए 2000 हाथियों को मारा और वह चंदन की लकड़ी की तस्करी किया करते थे. वीरप्पन के आपराधिक जीवन पर एक नज़र. 1955: वीरप्पन ने गोपीनाथम के पास पहली बार एक हाथी को मारा. 1955-1980: वीरप्पन ने 300 से भी ज़्यादा हाथियों को मारा. 1984-1986: कर्नाटक के वन विभाग के चार अधिकारियों की हत्या. अगस्त 1989: कर्नाटक के जंगल गार्ड मोहानियाह की गोली मार कर हत्या. फ़रवरी 1990: पुलिस ने डेढ़ करोड़ रुपए मूल्य की चंदन की लकड़ी बरामद की. अप्रैल 1990: कर्नाटक सरकार ने वीरप्पन को पकड़ने के लिए स्पेशल टास्क फ़ोर्स यानि एसटीएफ़ का गठन किया. नवंबर 1991: वीरप्पन ने एक वन अधिकारी श्रीनिवास को आत्मसमर्पण के बहाने से जगंलों में ले जाकर उनका सिर काट दिया. अप्रैल 1992: एक पुलिस दस्ते पर हमला, 22 लोगों की मौत. मई 1993: एसटीएफ़ ने वीरप्पन की पत्नी और बच्चे को गिरफ़्तार किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया. नवंबर 1993: वीरप्पन के आठ सहयोगियों की एक मुठभेड़ में मौत. दिसंबर 1994: तमिलनाडु के पुलिस उपाधीक्षक चिदंबरम समेत छह लोगों का अपहरण हुआ और फिर उन्हें रिहा कर दिया गया. वीरप्पन के भाई अर्जुनन को गिरफ़्तार किया गया. जनवरी 1997: नक्कीरन पत्रिका में वीरप्पन ने आत्मसमर्पण की पेशकश की इस शर्त के साथ कि सरकार उन्हें मुआवज़ा दे और उनके ख़िलाफ़ सभी मुक़दमों को वापस ले. सरकार ने इन शर्तों का कोई जवाब नहीं दिया. अक्तूबर 1997: मशहूर फ़ोटोग्राफ़र कृपाकार और सेनानी सहित सात लोगों का अपहरण और 10 दिन बाद उन्हें रिहा कर दिया गया. जुलाई 2000: मशहूर कन्नड़ फ़िल्म अभिनेता राजकुमार और तीन अन्य लोगों का गजानूर के पास अपहरण. नवंबर 2000: 100 से भी ज़्यादा दिनों तक बंधक बनाए रखने के बाद राजकुमार को रिहा कर दिया गया. अगस्त 2002: कर्नाटक के पूर्व मंत्री नागप्पा का अपहरण. दिसंबर 2002: कर्नाटक के जंगलों में नागप्पा का शव मिला. |
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