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वीरप्पन और तीन साथी मुठभेड़ में मारे गए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कर्नाटक-तमिलनाडु सीमा पर एक मुठभेड़ में सोमवार रात पुलिस के विशेष दस्ते ने कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को मार डाला. पुलिस के अनुसार वीरप्पन के तीन सहयोगी भी मारे गए हैं जिनके नाम हैं--सेतुगुड़ी गोविंदम, चंद्रेगौड़ा और सेतुमणि. स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ़) के प्रमुख के विजयकुमार ने बताया कि चंदन तस्कर को धर्मपुरी ज़िले के पप्परापट्टी गाँव में एक मुठभेड़ में मारा गया. चारों का शव पोस्टमार्टम के लिए धर्मपुरी अस्पताल पहुँचा दिया गया है. बीबीसी से एक विशेष बातचीत में कर्नाटक स्पेशल टास्क फ़ोर्स के कमांडर ज्योति प्रकाश मूजी ने बताया कि "वीरप्पन की पहचान पक्के तौर पर कर ली गई है और वह सौ प्रतिशत वीरप्पन ही है." मूजी ने बताया, "यह अचानक नहीं हुआ, बहुत दिन से इस पर काम चल रहा था, तीन दिन से हम उसके पीछे लगे थे." वीरप्पन के मारे जाने को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने स्पेशल टास्क फ़ोर्स की एक बड़ी कामयाबी बताया है, "मैं टास्क फ़ोर्स के सभी व्यक्तियों के प्रति आभार प्रकट करना चाहती हूँ जिन्होंने यह काम कर दिखाया है." लंबा आपराधिक इतिहास चेन्नई से बीबीसी संवाददाता संपत कुमार के अनुसार पुलिस को वीरप्पन की दो दशक से भी ज़्यादा समय से तलाश थी. सरकार ने उस पर पाँच करोड़ रुपए का इनाम घोषित कर रखा था.
चंदन लकड़ी की तस्करी से अपराध की दुनिया में पहली बार चर्चित होने वाले वीरप्पन पर बाद में दाँतों के लिए सैंकड़ों हाथियों को मारने के आरोप लगे. बाद में वीरप्पन ने फ़िरौती के लिए कई लोगों का अपहरण किया, जिनमें प्रसिद्ध कन्नड़ फ़िल्म अभिनेता राजकुमार शामिल थे. वीरप्पन ने कर्नाटक के पूर्व मंत्री एच. नागप्पा का भी अपहरण किया, बाद में जिनका शव बरामद हुआ. वीरप्पन पर हत्या के कोई सवा सौ मामले थे. |
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