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अंतिम संस्कार पर भी विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वीरप्पन का अंतिम संस्कार भी अब विवादों में घिर गया है. पहले यह तय हुआ था कि वीरप्पन और उनके तीन साथियों का अंतिम संस्कार उनके गाँव गोपीनाथम में किया जाएगा लेकिन अब ख़बर मिली है कि पुलिस ने वीरप्पन की लाश को उनके गाँव नहीं जाने दिया. क़ानून व्यवस्था की गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने वीरप्पन का अंतिम संस्कार पास के ही एक गाँव मुलक्कड़ में बुधवार की सुबह कर दिया. धर्मपुरी के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि वीरप्पन को उनकी पत्नी की मौजूदगी में दफ़न कर दिया गया. वीरप्पन के गाँव गोपीनाथम में लोगों की भारी भीड़ जमा हुई थी जिनमें वीरप्पन से सहानुभूति रखने वाले लोगों की बड़ी तादाद बताई जा रही थी. पुलिस अधिकारियों ने बीच रास्ते में ही तय किया कि वीरप्पन की लाश को गोपीनाथम ले जाना ठीक नहीं होगा और उन्होंने मुलक्कड़ में रूककर अंतिम संस्कार कर दिया. धर्मपुरी के अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद वीरप्पन का शव मंगलवार को उनकी पत्नी मुथुलक्ष्मी को सौंप दिया गया था. विवाद आरोप लगाए जा रहे हैं कि वीरप्पन को जीवित पकड़ने के बदले जानबूझकर मार डाला गया ताकि राजनीतिक हस्तियों से उनके संबंधों की बात खुल न जाए.
मानवाधिकार संगठन पीपुल्स वाच के प्रमुख हेनरी तिफ़ागने ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "वीरप्पन को घेरने वाले सौ पुलिसकर्मियों ने उसे आत्मसमर्पण को मजबूर क्यों नहीं किया, या फिर उसे सिर्फ घायल क्यों नहीं किया गया?" बंगलौर से बीबीसी के संवाददाता ने बताया है कि इसके जवाब में स्पेशल टास्क फोर्स के अधिकारी कह रहे हैं कि "वीरप्पन को पहले आत्मसमर्पण करने का मौक़ा दिया गया था लेकिन उसने गोलियाँ चलानी शुरू कर दीं." कर्नाटक के मुख्यमंत्री धर्म सिंह ने राजनेताओं के साथ वीरप्पन के संबंधों की जाँच कराए जाने की घोषणा की है. |
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