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भीड़ जुट रही है वीरप्पन की क़ब्र पर | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक मुठभेड़ में पिछले महीने मारे गए चंदन तस्कर वीरप्पन के नए-नए प्रशंसक सामने आ रहे हैं. वैसे लोग जो वीरप्पन के जीते-जी उनके क़रीब फटकने का साहस जुटा नहीं पाते, आज फूल-माला लिए उनकी क़ब्र पर जुट रहे हैं. मूलाकाडु गाँव स्थित वीरप्पन की क़ब्र तक पहुँचे राजा चंदन तस्कर के ऐसे ही प्रशंसकों में से हैं. वीरप्पन की तरह ही हैंडलबार मूँछें रखने वाले राजा अपने दोस्तों के साथ क़ब्र की परिक्रमा करते हुए वीरप्पन को मौन श्रद्धांजलि दे रहे हैं. वीरप्पन तमिलनाडु में कर्नाटक से लगने वाली सीमा पर एक मुठभेड़ में पुलिस के हाथों मारे गए थे. पुलिस को वीरप्पन की तलाश हत्या के 130 मामलों में थी, लेकिन उनके प्रशंसकों को इससे कोई मतलब नहीं. राजा वीरप्पन मार्का मूँछें शान से रखते हैं. उन्होंने कहा, "मैं क्यों डरूँ. मुझे ऐसी मूँछें रखने पर गर्व है. यह उसकी(वीरप्पन की) बहादुरी की निशानी है." फूल, माला और अगरबत्ती बातचीत के बीच में ही वीरप्पन के प्रशंसकों का एक दल सालेम शहर से वहाँ पहुँचा.
कई लोग क़ब्र पर फूल चढ़ाने के बाद वहाँ अगरबत्ती भी जलाते हैं. वहाँ पहुँच रहे लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएँ भी होती हैं. अपने पति और छोटी बहन के साथ आई पुष्पावती कहती हैं, "उसकी मौत की ख़बर ने हमें दुखी कर दिया. वीरप्पन ने कभी ग़रीबों को नहीं सताया, बल्कि उनकी मदद ही की." अब वीरप्पन के प्रशंसक उनका स्मारक बनाने पर विचार कर रहे हैं. अपनी श्रद्धांजलि देने वीरप्पन की क़ब्र पर जुटे किसान पांडियन ने कहा, "वह तमिलनाडु के ग़रीबों के हीरो थे." लेकिन ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ वीरप्पन के प्रशंसक ही उनकी क़ब्र पर पहुँच रहे हैं. राजेन्द्रन नामक एक छात्र ने कहा, "मैं तो मात्र उत्सुकतावश यहाँ आ पहुँचा. लेकिन जो मैं देख रहा हूँ उस पर विश्वास नहीं होता." अकेले रविवार को वीरप्पन की क़ब्र पर कोई एक हज़ार लोग पहुँचे. वहाँ किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हो यह सुनिश्चित करने के लिए तैनात पुलिस जवान ने कहा, "कोई आश्चर्य नहीं जो यहाँ कोई समाधि बना दी जाए." |
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