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हुर्रियत के साथ दूसरे दौर की बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादी संगठन ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ़्रेंस के नेताओं के बीच बुधवार को दूसरे दौर की बातचीत हुई है. बातचीत से पहले हुर्रियत प्रमुख मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने कहा कि केंद्र के साथ बातचीत नियमित रूप से होनी चाहिए और इसको संस्थागत स्वरूप दिया जाना चाहिए. समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में उन्होंने कहा था, ''हम चाहते हैं कि केंद्र के साथ बातचीत का स्वरूप संस्थागत कर दिया जाए. इससे हमारा आशय है कि इसे एक और बैठक न माना जाए बल्कि इसे दिल्ली, पाकिस्तान और कश्मीरी लोगों के बीच बातचीत का एक हिस्सा माना जाए.'' मीरवाइज़ ने स्पष्ट किया कि हुर्रियत कोई मांगें लेकर नहीं आई है. हम तो कश्मीर मुद्दे के राजनीतिक हल के लिए कुछ सुझाव पेश करेंगे. उनका कहना था कि हम चाहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर सहयोग का मुद्दा बने न कि टकराव का. बातचीत में मीरवाइज़ के अलावा अब्दुल गनी बट, बिलाल लोन, मौलाना अब्बास अंसारी, आगा सईद बडगामी और फज़लुल हक़ क़ुरैशी भी शामिल हुए. हुर्रियत नेताओं की प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से पहली मुलाक़ात पिछले साल सितंबर में हुई थी. | इससे जुड़ी ख़बरें 'कश्मीरी नेताओं का सहयोग चाहिए'25 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस हुर्रियत गुट का बैठक में आने से इनकार20 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस जम्मू कश्मीर पर 24 को व्यापक बैठक15 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सज्जाद लोन गुट को बातचीत का न्योता10 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'कश्मीर समस्या के हल की कोशिश हो'05 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस सरकार 'कश्मीरियों' से बातचीत को तैयार08 जुलाई, 2005 | भारत और पड़ोस प्रधानमंत्री ने दिया वाजपेयी को जवाब21 जून, 2005 | भारत और पड़ोस 'बातचीत में हुर्रियत को शामिल नहीं करेंगे'21 जून, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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