BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
सोमवार, 01 मई, 2006 को 21:52 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
रोज़गार गारंटी योजना की दिक्कतें

मजदूर
मजदूरों को तय न्यूनतम मजदूरी नहीं मिल पा रही है
इस वर्ष जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने देश के 200 ज़िलों में रोज़गार गारंटी योजना को लागू करने की घोषणा की थी तब रोज़गार के बुनियादी हक़ की मांग कर रहे लोगों ने इस कानून का स्वागत किया था.

इस महात्वाकांक्षी योजना के लिए शुरुआती तौर पर क़रीब छह हज़ार करोड़ की राशि तय की गई थी.

पर किसी भी योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि योजना का लाभ लोगों तक पहुँच रहा है या नहीं.

इस सवाल का हल खोजने जब मैं राजस्थान के एक पिछड़े माने जाने वाले ज़िले डूंगरपुर पहुँचा तो वहाँ की तस्वीर अलग थी.

डूंगरपुर राजस्थान के उन छह ज़िलों में से एक है जहाँ यह योजना लागू की गई है.

बानगी

इस ज़िले में 327 ग्राम पंचायतें हैं जिनमें डेढ़ लाख लोग इस योजना के तहत काम कर रहे हैं.

 हमें इंजीनियरों, एकाउंटेंट, लिपिक और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे पदों के लिए लोगों की आवश्यकता है. राज्य सरकार से इसकी अनुमति मिलते ही इस पर काम शुरू हो जाएगा
मंजू राजपाल, ज़िला कलेक्टर, डूंगरपुर

योजना के नियमों के अनुसार जहाँ काम हो रहा होगा, वहाँ मजदूरों के लिए छायादार जगह, प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था, छोटे बच्चों की देखरेख के इंतज़ाम, पीने का साफ़ पानी जैसी कई सुविधाएं भी देनी होंगी.

पर खारे पानी से भरी बाल्टी के अलावा इन सुविधाओं में से कुछ भी नज़र नहीं आया.

भले ही कानून में पारदर्शिता और सरकारी जवाबदेही को लेकर कई प्रावधान हों पर इस योजना के लागू होने को भी भ्रष्टाचार से बचाया नहीं जा सका है.

सागवाड़ा तहसील की एक ग्राम पंचायत में हम पहुँचे तो पाया कि योजना के तहत काम कर रहे लोगों से मजदूरी की पूरी रकम पर अंगूठा तो लगवाया जा रहा है पर लोगों को पूरा पैसा नहीं मिल रहा है.

रोज़गार गारंटी के मुद्दे पर काम कर रहे कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जब यह मुद्दा उठाया तो उसके बाद पंचायत सचिव ने घर-घर जाकर लोगों को पूरा पैसा दिया.

ज़रूरतें

योजना के नियमों की अनदेखी के बारे में जब प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत की तो सबने इसके लिए संसाधनों की कमी की बात कही.

मजदूर
कई लोगों को अभी तक रोज़गार कार्ड नहीं मिल सके हैं

हालांकि ज़िले भर में लोगों से बात करने पर पता चला कि इससे पहले लागू हुई योजनाओं की तुलना में इसमें काफ़ी ईमानदारी बरती जा रही है.

ज़िला प्रशासन मानता है कि इस योजना को और प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए कर्मचारियों, अधिकारियों की ज़रूरत पड़ेगी. अलग से कोई नियुक्ति न होने के कारण भी दिक्कतें आ रही हैं.

ज़िला कलेक्टर मंजू राजपाल ने बताया, "हमें इंजीनियरों, एकाउंटेंट, लिपिक और कंप्यूटर ऑपरेटर जैसे पदों के लिए लोगों की आवश्यकता है. राज्य सरकार से इसकी अनुमति मिलते ही इसपर काम शुरू हो जाएगा."

असंगत प्रावधान

राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी है 73 रूपए और इस हिसाब से योजना के तहत अगर कोई परिवार काम करता है तो उसे 100 दिनों के काम के बाद 7300 रूपए मिलने चाहिए.

 मजदूरी का संकट आने वाले दिनों में और भी बढ़ेगा क्योंकि केंद्र सरकार न्यूनतम मजदूरी की एक सीमा तय करने जा रही है. ऐसा करना राज्यों के अधिकार का उल्लंघन है
अरुणा रॉय, सदस्य-राष्ट्रीय सलाहकार परिषद

पर काम करनेवाले मजदूरों से पूछा तो पता चला कि काम तो 100 दिन मिलेगा पर 7300 रूपए नहीं.

हमने एक सामाजिक कार्यकर्ता से पूछा कि इसकी क्या वजह हो सकती है.

मजदूरों ने बताया कि उन्हें एक दिन के काम के बदले 45-50 रूपए ही मिल पा रहे हैं.

जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता और राष्ट्रीय सलाहकार परिषद की सदस्य अरुणा रॉय ने बताया, " मजदूरी का संकट आने वाले दिनों में और भी बढ़ेगा क्योंकि केंद्र सरकार न्यूनतम मजदूरी की एक सीमा तय करने जा रही है. ऐसा करना राज्यों के न्यूनतम मजदूरी तय करने के अधिकार का उल्लंघन है."

इतना तो साफ़ है कि लोग इस योजना को लेकर काफ़ी उत्साहित हैं, पर सवाल उठ रहे हैं तो कानून की गारंटी को लेकर जो दिल्ली से देश के गांवों तक पूरी तरह से नहीं पहुँच पा रही है.

इससे जुड़ी ख़बरें
क्या हैं योजना से जुड़ी आशंकाएँ?
02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस
भारत में रोज़गार गारंटी योजना लागू
02 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस
रोज़गार गारंटी विधेयक पारित
23 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस
पाकिस्तान में बेतहाशा बेरोज़गारी
31 अक्तूबर, 2004 | भारत और पड़ोस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>