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वीपी ने फिर बनाया जनमोर्चा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अपना जनमोर्चा एक बार फिर खड़ा कर दिया है और समाजवादी पार्टी के निलंबित सांसद राज बब्बर को इसकी कमान सौंपी है. इस बार जनमोर्चा को किसान मंच की राजनीतिक शाखा का नाम दिया गया है और कहा गया है कि ये मोर्चा विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगा. इस मोर्चे का अपना एक अलग झंडा भी होगा. उल्लेखनीय है कि विश्वनाथ प्रताप सिंह (वीपी सिंह) ने राजीव गाँधी के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ने के लिए रामधन, आरिफ़ मोहम्मद ख़ान, अरुण नेहरू और विद्याचरण शुक्ला के साथ मिलकर जनमोर्चा का गठन किया था. वो जनमोर्चा बाद में जनता दल में विलीन हो गया था और चुनाव जीतकर विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बन गए थे. बब्बर को काम रविवार को दिल्ली में अपने निवास में विश्वनाथ प्रताप सिंह ने जनमोर्चा के गठन की घोषणा की. उन्होंने कहा, "किसान मंच पिछले कुछ समय से किसानों, मज़दूरों, बुनकरों, युवाओं और महिलाओं की समस्या को लेकर संघर्ष कर रहा है लेकिन अब लगता है कि इस संघर्ष को प्रभावी बनाने के लिए विधायिका में भी लोगों को भेजना आवश्यक है." वीपी सिंह ने कहा कि जनमोर्चा कोई अलग दल न होकर किसान मंच की राजनीतिक शाखा है.
हालांकि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यह राजनीतिक शाखा किसी राजनीतिक दल की तरह राजनीति पूरी करेगी और राजनीतिक दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी. यहाँ तक कि इस घोषणा के साथ ये भी बता दिया गया कि सीपीआई (एमएल) ने जनमोर्चा को सहयोग और भागीदारी का आश्लासन दिया है. वैसे इस मोर्चे को लालू प्रसाद यादव के राष्ट्रीय जनता दल ने भी सहयोग का आश्लासन दिया है. इस जनमोर्चा का अध्यक्ष आगरा के सांसद राज बब्बर को बनाया गया है. राज बब्बर को पिछले दिनों समाजवादी पार्टी से निलंबित कर दिया गया था क्योंकि उनके और पार्टी के महासचिव अमर सिंह के बीच तलवारें खिंच गईं थीं. फ़िलहाल राज बब्बर को समाजवादी पार्टी से निकाला नहीं गया है.
और इसलिए जनमोर्चा को फ़िलहाल राजनीतिक दल न कहकर किसान मंच की राजनीतिक शाखा कहा गया है. हालांकि ऊपर नीचे नीली पट्टी और बीच में हरी पट्टी वाले झंडे तले जनमोर्चा करेगा वो सब कुछ जो कोई राजनीतिक पार्टी कर सकती है. राज बब्बर ने रविवार को ही स्पष्ट कर दिया कि उनके निशाने पर सत्ताधारी और उनकी अपनी पार्टी समाजवादी पार्टी है. उन्होंने जनमोर्चा को 'तीसरा मोर्चा' भी बताया और अमरसिंह, मुलायम सिंह का नाम लिए बिना कहा, "जो लोग पूँजीपतियों के साथ मिलकर, दलालों के हाथों तीसरा मोर्चा बना रहे थे उनको देखना चाहिए कि संघर्ष करने वाले लोगों ने मिलकर किस तरह जनमोर्चा का गठन कर लिया है." उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव को ज़्यादा दिन नहीं बचे हैं और ऐसे समय में जनमोर्चा का पुनर्जन्म राजनीतिक समीकरण बनाए न बनाए बिगाड़ तो सकता ही है. | इससे जुड़ी ख़बरें राज बब्बर समाजवादी पार्टी से निलंबित08 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस राज बब्बर संसदीय दल से निलंबित07 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस अहम है तीसरे मोर्चे की भूमिका01 अक्तूबर, 2005 | भारत और पड़ोस 'जातीय घृणा दूर करने के लिए आंदोलन ज़रूरी'01 सितंबर, 2005 | भारत और पड़ोस भाजपा को हटाना ज़रुरीः वी पी सिंह03 मई, 2004 | भारत और पड़ोस 'वीपी सिंह पर लोगों को भरोसा था'29 अप्रैल, 2004 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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