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रविवार, 02 अप्रैल, 2006 को 11:31 GMT तक के समाचार
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मोटी तनख्वाह नहीं अपना काम करेंगे

भारतीय प्रबंधन संस्थान
गौरव और शरत ने नई मिसाल कायम करने की कोशिश की
वैसे तो भारतीय प्रबंधन संस्थान के छात्र अपनी मोटी तनख्वाह के लिए ही चर्चा में रहते हैं, लेकिन इस बार कुछ छात्रों ने मोटी तनख्वाह की जगह अपना ही धंधा शुरु करने का फ़ैसला किया है.

इन दोनों छात्रों का रवायत से अलग हटकर कुछ करने का फ़ैसला बहुत सोच समझ कर किया गया था और इसके लिए उन्हें आई आई एम का समर्थन भी मिला है.

जहां आम तौर पर आईआईएम के छात्र बहुराष्ट्रीय कंपनियों में काम करते हैं वहीं गौरव दगोनकर ने संगीत एलबम निकाला है और शरत बाबू कैटरिंग का धंधा करना चाहते हैं.

गौरव ने फ़िलहाल तीन गीतों वाला एक संगीत एलबम निकाला है जिसकी वह बाद में वीडियो बनाना चाहते हैं.

 'मेरे कुछ मित्रों ने अपना पहला वेतन मेरी एलबम के वीडियो के लिए देने की बात कही है
गौरव दगोनकर

उनका कहना है कि उन्हें बचपन से संगीत का शौक रहा है 'मेरे कुछ मित्रों ने अपना पहला वेतन मेरी एलबम के वीडियो के लिए देने की बात कही है. कुछ संगीत कंपनियों से भी बात चल रही है.'

गौरव का कहना है कि आईआईएम से प्राप्त ज्ञान का उपयोग वह संगीत की दुनिया में करना चाहेंगे.

कैटरिंग करेंगे शरत

शरत बाबू की कहानी दिलचस्प है. उनका बचपन संघर्ष के बीच बीता है. शरत की माँ दीपा रमानी मध्यान्ह भोजन योजना के तहत एक स्कूल में काम करती थी और मात्र 30 रूपए का वेतन पाती थी.

दीपा काम के बाद घर पर इडली बनाती थी जिसे शरत चेन्नई के सड़कों पर बेचा करते थे. इन कठिनाईयों के बीच शरत ने शिक्षा जारी रखी और अब आईआईएम से शिक्षा पूरी कर चुके हैं.

जब उन्होंने कैटरिंग कंपनी खोलने का एलान किया तो उनकी माँ वहीं मौजूद थी. शरत ने साढ़े आठ लाख रुपए सालाना के वेतन की नौकरी छोड़ ये काम करने का निर्णय किया है.

 मैं कैटरिंग का काम इसलिए करना चाहता हूँ क्योंकि इसमें मैं ज़्यादा लोगों को रोज़गार दे सकूंगा
शरत बाबू

उनका सपना है कि आने वाले सालों में वे 50 हज़ार लोगों को नौकरी प्रदान कर सकें.

शरत कहते हैं 'बचपन से अब तक मैंने बहुत कष्ट झेले हैं. आज खुशी तो है पर संतुष्टि नहीं है क्योंकि अभी बहुत कुछ करने को है. मैं कैटरिंग का काम इसलिए करना चाहता हूँ क्योंकि इसमें मैं ज़्यादा लोगों को रोज़गार दे सकूंगा और फिर मैंने बचपन में अच्छा खाना पाने के बाद ग्राहक के चेहरे की संतुष्टि देखी है.'

इन दोनों छात्रों को प्रोत्साहन देने के लिए जानी मानी आईटी कंपनी इंफोसिस के मालिक नारायण मूर्ति मौजूद थे. उनका कहना था 'आईआईएम जैसी जगह से पढ़ने के बाद छात्रों को हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए.'

शरत के बारे में उनका कहना था 'आज सही मायने में बड़ा दिन है जब एक संघर्ष का जीवन जीने वाला छात्र अपनी माँ की मेहनत से सर्वश्रेष्ठ शिक्षा प्राप्त कर अपने जैसे और लोगों को रोज़गार देना चाहता है.'

शरत और गौरव आने वाले दिनों में अपने प्रदर्शन से प्रबंधन संस्थानों के छात्रों के लिए एक मिसाल बन सकते हैं.

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