|
आईआईएम की फ़ीस न घटाने का फ़ैसला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में नई सरकार ने भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम की फ़ीस घटाने के पिछली सरकार के फ़ैसले को वापस ले लिया है. नई दिल्ली में मंगलवार को मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने सभी छह आईआईएम के निदेशकों और चेयरमैन के साथ बैठक की. बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अर्जुन सिंह ने कहा कि सभी संस्थानों में फ़ीस पहले की तरह ही होगी यानी कम नहीं होगी. लेकिन सभी आईआईएम ग़रीब छात्रों के लिए छात्रवृत्ति देने के लिए तैयार हो गए हैं. अर्जुन सिंह ने कहा, "इन संस्थानों में दाख़िला पाने वाले हर उस छात्र को वित्तीय सहायता मिलेगी जिनके परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपए या उससे कम है. ज़रूरत पड़ने पर छात्र की पूरी फ़ीस भी माफ़ हो सकती है." उन्होंने कहा कि ट्यूशन फ़ीस के अलावा ज़रूरतमंद छात्रों से हॉस्टल फ़ीस नहीं ली जाएगी और उनके खाने-पीने की भी व्यवस्था की जाएगी. 'ग़ैर ज़िम्मेदार फ़ैसला' पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान आईआईएम के साथ संबंधों पर टिप्पणी करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि इन संस्थानों की स्वायत्तता क़ायम रखते हुए देश के व्यापक हित में सारे मसले सुलझा लिए गए हैं. विवाद के लिए पिछली सरकार को ज़िम्मेदार ठहराते हुए अर्जुन सिंह ने कहा, "मुझे जानकारी मिली है कि पिछली सरकार ने फ़ीस घटाने का फ़ैसला करते समय वित्त मंत्रालय और मानव संसाधन विकास मंत्रालय के वित्तीय विभाग से सलाह-मशविरा नहीं किया." उन्होंने कहा कि पिछली सरकार का फ़ैसला क़ायदे-क़ानून को दरकिनार करके लिया गया था और इसलिए उसे वापस लेना ज़रूरी था. इस साल फ़रवरी में पिछली सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्री मुरली मनोहर जोशी ने आईआईएम की फ़ीस डेढ़ लाख से घटाकर 30 हज़ार रुपए कर दी थी. जिस पर विवाद खड़ा हो गया था. अर्जुन सिंह ने बताया कि ज़रूरतमंद छात्रों की सहायता की राशि अहमदाबाद. कोलकाता और बंगलौर के आईआईएम अपने आंतरिक संसाधनों से जुटाएँगे जबकि आवश्यकता पड़ने पर लखनऊ, इंदौर और कोज़ीकोड की सहायता मंत्रालय करेगा. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||