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प्रमुख प्रबंधन संस्थान फ़ीस नहीं घटाएगा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रमुख प्रबंधन संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, अहमदाबाद(आईआईएमए) ने सरकारी निर्देश के बावजूद इस साल फ़ीस नहीं घटाने का फ़ैसला किया है. संस्थान के प्रबंधन बोर्ड की शनिवार को हुई बैठक में यह फ़ैसला किया गया. केंद्र सरकार ने इसी साल फ़रवरी में फ़ीस घटाने का निर्देश यह कहते हुए दिया था कि ऐसा करना निर्धन छात्रों को भी दाखिले का अवसर दिलाने के लिए ज़रूरी है. सरकारी फ़ैसले पर उठे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार के क़दम को सही ठहराया था, साथ ही कहा था कि सरकार आईआईएम के कामकाज़ में कोई दखल नहीं करे. अब आईआईएमए ने कहा है कि जब तक फ़ीस में कटौती के निर्देश को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला नहीं आ जाता फ़ीस के पुराने ढाँचे को जारी रखा जाएगा. संस्थान ने कहा है कि इस मसले पर केंद्र सरकार से बातचीत की जाएगी ताकि कोई बीच का रास्ता निकाला जा सके. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट के देश भर में छह संस्थान अहमदाबाद, बैंग्लौर, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर और कोझीकोड में हैं. सरकार ने फ़ीस घटाकर 30,000 रुपए प्रति वर्ष करने का फ़ैसला किया है जो कि पहले डेढ़ लाख रुपये थी. मानव संसाधन मंत्रालय ने कहा था कि फ़ैसला उच्चतम न्यायालय के हाल ही में आए एक आदेश और इन संस्थानों के काम-काज से जुड़ी एक समीक्षा समिति के निर्देशों के बाद लिया गया है. इन संस्थानों को 2004-05 के शैक्षणिक सत्र से घटी हुई फ़ीस लेने को कहा गया था. |
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