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आईआईएम की फ़ीस में भारी कटौती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम की फ़ीस में भारी कटौती की गई है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय का दावा है कि उसके इस फ़ैसले से बड़ी संख्या में छात्रों को फ़ायदा होगा. जो फ़ीस पहले लगभग डेढ़ लाख रुपए प्रतिवर्ष तक थी वो अब घटाकर 30,000 रुपए प्रति वर्ष कर दी गई है. मंत्रालय ने आदेश में कहा है कि ये फ़ैसला उच्चतम न्यायालय के हाल ही में आए एक आदेश और इन संस्थानों के काम-काज से जुड़ी एक समीक्षा समिति के निर्देशों के बाद लिया गया है. ये फ़ीस अब नए सत्र यानी 2004-05 के शैक्षणिक सत्र से लागू होगी. मंत्रालय ने कहा है कि अहमदाबाद, बैंग्लौर, कोलकाता, लखनऊ, इंदौर और कोझीकोड स्थित इन संस्थानों की फ़ीस प्रति वर्ष लगभग डेढ़ लाख है जो कि बहुत ज़्यादा है. मंत्रालय के अनुसार ये सभी संस्थान केंद्र सरकार से सहायता पाते हैं और इनकी वित्तीय ज़रूरतों को केंद्रीय बजट से पूरा किया जाता है. आदेश के अनुसार सभी पहलुओं पर सावधानी से विचार के बाद ये फ़ैसला किया गया है कि स्नातकोत्तर शिक्षा कार्यक्रमों की फ़ीस आईआईएम में प्रति वर्ष 30,000 रुपए रखी जानी चाहिए. मंत्रालय का कहना है कि इस फ़ीस के अलावा छात्रों से किसी भी तरह से कोई शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए. उनसे इसके अलावा सिर्फ़ 'मेस' की फ़ीस ली जा सकती है जो छात्र अलग से देंगे. |
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