| पिछली नीतियों में बदलाव के संकेत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मनमोहन सिंह सरकार के ज़्यादातर मंत्रियों ने सोमवार को अपना कार्यभार संभाल लिया है. सरकार के कई शीर्ष मंत्रियों ने अपने-अपने मंत्रालय के दायरे में आने वाली पूर्व राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार यानी एनडीए की नीतियों की समीक्षा करने की बात कही है. आतंकवाद निरोधक क़ानून पोटा को लेकर काँग्रेस पार्टी पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्तियों को ज़ाहिर कर चुकी है लेकिन गृह मंत्री शिवराज पाटिल ने पदभार संभालने के बाद स्पष्ट तौर पर कह दिया कि पोटा की अब कोई ज़रूरत नहीं. दूसरी ओर रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भी स्पष्ट किया है कि अगर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के दौरान रक्षा सौदे में धाँधली की कोई पुख़्ता शिकायत मिलती है तो इसकी जाँच कराई जा सकती है.
जबकि मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने भारतीय प्रबंधन संस्थान यानी आईआईएम के मामले पर स्पष्ट किया कि काँग्रेस गठबंधन सरकार संस्थान की स्वायत्तता बनाए रखेगी. आर्थिक मोर्चे पर भले ही वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने आर्थिक सुधार जारी रखने की बात कही लेकिन उन्होंने भी एनडीए सरकार की शाइनिंग इंडिया की खिल्ली उड़ाई और कहा कि भारत की जनता ने इसे ख़ारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि आर्थिक सुधार का मानवीय चेहरा सामने आएगा और कृषि क्षेत्र को प्रमुखता दी जाएगी जो पूर्व सरकार ने नहीं दी. रसायन और उर्वरक मंत्री रामविलास पासवान ने ज़ोर दिया की फ़ायदे में चल रही सरकारी कंपनियों का विनिवेश नहीं करने की बात वे सामने रखेंगे. |
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