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आर्थिक सुधार जारी रहेंगे:चिदंबरम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के नए वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा है कि पहले से जारी आर्थिक सुधार जारी रहेंगे और बेरोज़गारी दूर करने पर ख़ास ज़ोर रहेगा. सोमवार को पदभार सँभालते ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताएँ गिनाईं जिनमें शामिल हैं - आर्थिक सुधार जारी रखना और वित्तीय घाटे को कम करना. उन्होंने कहा कि कृषि और उत्पादन क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ साथ बेरोज़गारी घटाने पर ख़ास ध्यान दिया जाएगा. चिदंबरम ने कहा, "आर्थिक सुधारों को जारी रखना तो बिल्कुल साफ़ है क्योंकि हम देश के असली आर्थिक सुधारक डॉ मनमोहन सिंह के दिनों में वापस जा रहे हैं. पूरे देश को उनसे उम्मीदें हैं." कृषि और उत्पादन क्षेत्र पर ज़ोर देते हुए चिदंबरम ने अपनी पहली प्रेस कॉंफ़्रेंस में कहा कि इन दोनों क्षेत्रों में बहुत निवेश चाहिए, सार्वजनिक भी और निजी भी. "मेरी कोशिश होगी निवेश को बढ़ावा देना क्योंकि उसी से नौकरियाँ भी बढ़ेंगी." चिदंबरम का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था एक ऐसी स्थिति में है जहाँ से वो विकास और मुद्रा स्फीति की दृष्टि से मज़बूती की तरफ़ बढ़ सकती है. पिछले साल दिसंबर तक की तीसरी तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था में 10.4 प्रतिशत का विकास हुआ. वित्त मंत्री चिदंबरम ने वादा किया कि वो भारत के वित्तीय घाटे को क़ाबू में रखने की पूरी कोशिश करेंगे क्योंकि वित्तीय घाटे को अंतरराष्ट्रीय आर्थिक रेटिंग एजेंसियाँ विकास के रास्ते में बाधक मानती हैं. 58 साल के पलनिअप्पल चिदंबरम 1996 में भी देश के वित्त मंत्री बने थे जब उन्होंने मनमोहन सिंह के बाद ये पद सँभाला था. |
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