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बहुत कुछ नहीं बदलनेवालाः गुरचरण दास | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जाने-माने आर्थिक विश्लेषक गुरचरण दास का मानना है कि मनमोहन सिंह जैसे आर्थिक विशेषज्ञ के प्रधानमंत्री बनने से भारत में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आएगा. बीबीसी के साप्ताहिक कार्यक्रम आप की बात बीबीसी के साथ में उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया धीमी गति से चलती रहेगी. श्रोताओं के सवालों के जवाब में उन्होंने कहा कि अगर मनमोहन सिंह की नज़र 2009 के चुनाव पर है तो उन्हें सरकार के काम-काज में सुधार पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. गुरचरण दास ने कहा,"भारत को नई नीतियाँ नहीं चाहिए. नीतियाँ पहले ही काफ़ी हैं. आवश्यकता इस बात की है कि नीतियों का सही तरीक़े से पालन हो". उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश में सरकारों के बदलने से आम इंसान की ज़िंदगी नहीं बदला करती. प्रशासनिक सुधार गुरचरण दास ने मनमोहन सिंह सरकार को दो मोर्चों पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया. पहला सुझाव दिया उन्होंने प्रशासनिक ढांचे में सुधार करने का. फिर उन्होंने कहा कि सरकार को आर्थिक सुधारों में विश्वास पैदा करना चाहिए क्योंकि भारत में भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी समस्या का उत्तर केवल आर्थिक सुधार है. साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार को सबसे पहले कृषि क्षेत्र और फिर शिक्षा की स्थिति बेहतर करने के लिए उपाय करना चाहिए. उम्मीद गुरचरण दास ने कहा कि मनमोहन सिंह के लिए गठबंधन सरकार चलाना आसान नहीं होगा. उन्होंने कहा,"मनमोहन सिंह अच्छे व्यक्ति हैं मगर मज़बूत व्यक्ति नहीं. ये देखना है कि वे शक्ति कहाँ से लाते हैं". गुरचरण दास ने मनमोहन सिंह के सामने अटल बिहारी वाजपेयी की 24 दलों वाली साझा सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि गठबंधन की मजबूरियों को बावजूद वाजपेयी सरकार ने आर्थिक सुधार जारी रखा. |
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