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मनमोहन सरकार का काम शुरू | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में डॉक्टर मनमोहन सिंह की नई सरकार ने मंत्रिपरिषद के गठन और विभागों की घोषणा के बाद सोमवार को औपचारिक रूप से कामकाज शुरू कर दिया है. शनिवार को मंत्रिपरिषद के सदस्यों को शपथ दिलाई गई थी लेकिन गठबंधन के सहयोगी दलों में मंत्रिपदों को लेकर कशमकश को देखते हुए मंत्रियों के विभागों की घोषणा रविवार की रात को ही हो सकी. मंत्रिपरिषद के आकार पर नज़र डालें तो एक नहीं कई अनोखी बातें नज़र आएंगी. मसलन भारत का दावा है कि वह दुनिया का सबसे युवा देश है और इसका आधार यह है कि उसकी आबादी का बड़ा हिस्सा चालीस साल से कम उम्र का है. यानी इन चुनावों में भी पहली बार युवाओं की भारी संख्या ने हिस्सा लिया था. लेकिन मंत्रिमंडल के सदस्यों की उम्र पर नज़र डालें तो औसत बनता है 63 साल यानी डॉक्टर मनमोहन सिंह की इस सरकार की औसत आयु है तरेसठ साल. इससे साफ़ होता है कि युवावस्था के मुक़ाबले अनुभव को ज़्यादा तरजीह दी गई है और इससे यह संदेश जाता है कि नई सरकार अपनी छवि को नहीं बदल पाई है. जानकारों का कहना है कि पार्टी अपनी सरकार को युवा चेहरा देने का मौक़ा चूक गई है. प्रधानमंत्री के बाद दूसरे नंबर पर माने जाने वाले गृह मंत्री का पद दिया है शिवराज पाटिल को जो इस बार लोक सभा चुनाव हार गए हैं.
हालाँकि वह कई बार लोक सभा चुनाव जीत चुके हैं और लोक सभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं. शिवराज पाटिल अकेले ऐसे नेता नहीं हैं जिन्हें हार के बावजूद मंत्रिमंडल में जगह मिली है. पीएम सईद भी नौ बार से लोक सभा का चुनाव जीतते आए हैं लेकिन इस बार हार गए फिर भी उन्हें नए मंत्रिमंडल में अहम विभाग मिला है. यहाँ तक कि ख़ुद प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह भी लोक सभा के नहीं राज्य सभा के सदस्य हैं और उन्होंने एक बार भी लोक सभा का चुनाव नहीं जीता है. ऐसे हालात में कुछ राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि मंत्रिपदों पर ऐसे लोगों को बिठाया गया है जो गाँधी परिवार के नज़दीक रहे हैं. नए आर्थिक माहौल में बेहद महत्वपूर्ण बन चुका वित्त मंत्रालय दिया गया है पी चिदंबरम को जो पहले भी यह ज़िम्मेदारी संभाल चुके हैं और उनके नाम से शेयर बाज़ार को एक संदेश देने की कोशिश की गई है जो अस्थिर चल रहा है. पूर्व राजनयिक और विदेश मंत्रालय की ज़िम्मेदारी संभाल चुके नटवर सिंह को फिर से इस मंत्रालय की ज़िम्मेदारी ऐसे हालात में सौंपी गई है जब पड़ोसी पाकिस्तान के साथ दोस्ती बढ़ाने की कोशिशें चल रही हैं. नटवर सिंह पाकिस्तान में भारत के उच्चायुक्त भी रह चुके हैं. अब उनके सामने कश्मीर मसले को सुलझाना और पाकिस्तान के साथ दोस्ती की कोशिशों को ठोस रूप देना एक बड़ी चुनौती होगी. |
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