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छह पूर्व प्रधानमंत्री मौजूद थे शपथ में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नई सरकार में सात महिलाओं को मंत्रिपरिषद में जगह दी गई है जबकि नए मंत्रिपरिषद में 28 सदस्यों ने हिंदी में और 40 सदस्यों ने अंग्रेज़ी में शपथ ली. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंग्रेज़ी में ही शपथ ली. इनके अलावा कुल 42 लोगों ने ईश्वर और 26 ने सत्यनिष्ठा की शपथ ली है. कार्यक्रम में कुल छह पूर्व प्रधानमंत्री मौजूद थे और किसी भी प्रधानमंत्री के शपथग्रहण में इतने पूर्व प्रधानमंत्री कभी नहीं रहे. कार्यक्रम में विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, पीवी नरसिंहराव, एचडी देवेगौड़ा, इंद्र कुमार गुजराल और अटल बिहारी वाजपेयी मौजूद थे. देश में पहली बार इतनी बड़ी संख्या में पूर्व प्रधानमंत्री हो गए हैं. कुल 28 कैबिनेट, 10 राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और 29 राज्य मंत्री बनाए गए हैं. मंत्रिपरिषद में सर्वाधिक प्रतिनिधित्व तमिलनाडु का है जहाँ के 12 मंत्री हैं जबकि दूसरे स्थान पर बिहार हैं जहाँ से 11 सांसद मंत्री बनाए गए हैं. कैबिनेट स्तर में सिर्फ़ एक ही महिला मीरा कुमार को जगह मिली है. जबकि दो महिलाएँ रेणुका चौधरी और कुमारी शैलजा को स्वतंत्र प्रभार की राज्य मंत्री बनाया गया है. कभी देश की राजनीति पर नियंत्रण रखने वाले उत्तर प्रदेश के हिस्से में इस बार सिर्फ़ एक ही काबीना दर्जे का मंत्रालय आया है और वो है महावीर प्रसाद के पास. जबकि तमिलनाडु के पास छह काबीना मंत्रालय हैं. 28 कैबिनेट मंत्रियों में से 19 कांग्रेस ने अपने पास रखे हैं जबकि नौ सहयोगियों को दिए हैं. चुनाव हार जाने वाले शिवराज पाटिल, प्रफुल्ल पटेल और पीएम सईद को भी मंत्री बनाया गया है जबकि हंसराज भारद्वाज, अर्जुन सिंह, ग़ुलाम नबी आज़ाद और नटवर सिंह जैसे नेता तो चुनाव मैदान में उतरे ही नहीं. कांतिलाल भूरिया, महावीर प्रसाद, मीरा कुमार और शिबू सोरेन जैसे दलित और आदिवासी नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया गया है. इसके साथ ही मनमोहन सिंह डॉक्टरेट की उपाधि वाले पहले प्रधानमंत्री भी बन गए हैं. |
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