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पोटा की ज़रूरत नहीं है:पाटिल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने नए गृहमंत्री शिवराज पाटिल ने कहा है कि विवादास्पद क़ानून पोटा की देश को कोई ज़रूरत नहीं है. ग़ौरतलब है कि 'आतंकवाद निरोधक क़ानून' पोटा को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने लागू किया था. शिवराज पाटिल ने सोमवार को गृह मंत्रालय का कार्यभार संभालने के समय कहा कि 'पोटा की कोई ज़रूरत नहीं' थी. पाटिल ने संवाददाताओं से कहा कि उनकी सरकार पोटा की विस्तार से समीक्षा करेगी. नई सरकार ने अपने गठन के साथ ही संकेत दिया था कि वह पोटा को ख़त्म करना चाहती है और गठबंधन के न्यूनतम साझा कार्यक्रम में भी ऐसा ही कहा गया है. सरकार ने यह भी कहा था कि पोटा को समाप्त करने के लिए जल्दी ही क़ानूनी पहल की जाएगी. दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने कहा था, "आतंकवादियों की छाया पूरे देश पर मंडरा रही है." अब नायडू ने कहा कि पोटा देश हित में ही लागू किया गया था. उन्होंने कहा, "हो सकता है कि कुछ राज्य सरकारों ने पोटा का दुरुपयोग किया हो या उसकी सही तरह से इस्तेमाल नहीं किया हो" लेकिन पोटा को ख़त्म करने की कोई वजह नज़र नहीं आती. हुर्रियत से बातचीत कश्मीरी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कान्फ्रेंस से बातचीत के बारे में पाटिल ने कहा कि इसमें कुछ देर हो सकती है क्योंकि हुर्रियत को अभी तय करना है कि वे नई सरकार से बातचीत करना चाहते हैं या नहीं.
"नई केंद्रीय सरकार को अभी यह भी देखना है कि अभी तक हुई बातचीत में क्या ख़ास प्रगति हुई है." पाटिल ने कहा, "हमारी सरकार बातचीत की प्रक्रिया में भरोसा रखती है इसलिए ज़ोर बातचीत जारी रखने पर ही होगा लेकिन यह हुर्रियत को तय करना है कि वह हमारे साथ बातचीत करना चाहती है या नहीं." नए गृह मंत्री ने साथ ही यह भी कहा कि हालाँकि बातचीत का प्रक्रिया जारी रखी जाएगी लेकिन 'आतंकवाद से सख़्ती से निपटा जाएगा'. |
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