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मंगलवार, 21 मार्च, 2006 को 07:56 GMT तक के समाचार
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'पनडुब्बी सौदे में अतिरिक्त भुगतान नहीं'
पनडुब्बी
स्कोर्पीन पनडुब्बी का सौदा मूल रुप से एनडीए सरकार के कार्यकाल में हुआ था
केंद्र की यूपीए सरकार में रक्षामंत्री प्रणव मुख़र्जी ने एनडीए के आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि स्कोर्पीन पनडुब्बी की ख़रीदी के लिए कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया गया.

उन्होंने कहा है कि 2002 में हुए इस सौदे के लिए उल्टे यूपीए सरकार ने क़ीमतें कुछ कम करवाने में सफलता हासिल की.

उल्लेखनीय है कि सोमवार को प्रमुख विपक्षी गठबंधन एनडीए ने स्कोर्पीन पनडुब्बी ख़रीदी मामले में घोटाले के 'पुख़्ता सबूत' होने का दावा करते हुए कहा था कि इस सौदे को रद्द कर एक जाँच आयोग बैठाया जाए.

एनडीए नेताओं ने इसे यूपीए सरकार का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए कहा था कि फ़्रांस के साथ 187.98 अरब रुपयों के इस सौदे में चार प्रतिशत कमीशन दिया गया था.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने तो इस पर कोई टिप्पणी करने से इंकार कर दिया था लेकिन रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने सोमवार को ही किसी भी घोटाले से इंकार किया था.

मंगलवार को लोकसभा में इस मामले पर ख़ुद होकर एक बयान देते हुए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने दो फ़्रांसीसी फ़र्मों को 45 अरब रुपयों का कोई अतिरिक्त भुगतान नहीं किया गया.

 फ़्रांसीसी फ़र्मों के साथ 16000 करोड़ रुपयों का कोई पनडुब्बी सौदा नहीं किया गया बल्कि फ़्रांस की दो फ़र्मों अर्मारिस और एमबीडीए के साथ 7197 करोड़ रुपयों के सौदों का समझौता हुआ है
प्रणव मुखर्जी

उन्होंने कहा कि स्कोर्पीन पनडुब्बी का सौदा वर्ष 2002 में हुआ था और उस समय जिन क़ीमतों पर सौदा हुआ था उसमें यूपीए सरकार ने इस पर नए सिरे से विचार किया और चर्चा की और क़ीमतों में 313 करोड़ रुपयों की कमी करवाने में सफलता पाई.

उन्होंने कहा, "फ़्रांसीसी फ़र्मों के साथ 16000 करोड़ रुपयों का कोई पनडुब्बी सौदा नहीं किया गया बल्कि फ़्रांस की दो फ़र्मों अर्मारिस और एमबीडीए के साथ 7197 करोड़ रुपयों के सौदों का समझौता हुआ है."

रक्षामंत्री मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए दोनों फ़र्मों के साथ अलग से समझौता किया गया है.

उन्होंने सदन में कहा कि इस सौदे को लेकर जो ख़बरें प्रकाशित हुई थीं उसका फ़्रांसीसी दूतावास ने भी खंडन किया है और इसके ख़िलाफ़ फ़्रांसीसी फ़र्म ने दिल्ली हाईकोर्ट में मुक़दमा भी दायर किया है.

प्रणव मुखर्जी ने इस बात से इंकार किया कि नौसेना से सूचनाएँ लीक होने और पनडुब्बी सौदे का आपस में कोई संबंध है.

आरोप

उल्लेखनीय है कि पुख़्ता सबूत होने का दावा करते हुए एनडीए नेताओं ने स्कोर्पीन पनडुब्बी सौदे में दलाली दिए जाने का दावा किया था.

उल्लेखनीय है कि भारत में सैन्य ख़रीदी में किसी भी मध्यस्थ यानी दलाल की अनुमति नहीं है.

उधर एनडीए आरोप लगा रहा है कि इस मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद के बेटे अभिषेक वर्मा ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई.

एनडीए नेता लालकृष्ण आडवाणी, जसवंत सिंह और जॉर्ज फ़र्नांडिस ने इस सौदे को मनमोहन सिंह सरकार का 'बोफ़ोर्स मामला' बताते हुए कहा, "यह अब तक का सबसे बड़ा सैन्य ख़रीदी घोटाला है, बोफ़ोर्स से भी बड़ा."

एनडीए नेताओं ने आरोप लगाया कि स्कोर्पीन पनडुब्बी बेचने वाली फ़्रांसिसी कंपनी थेल्स पर पहले भी आरोप हैं कि उसने दुनिया भर में राजनीतिकों को घूस दी और विश्व बैंक ने इस कंपनी पर रोक भी लगा रखी है.

उन्होंने अभिषेक वर्मा पर भी कई आर्थिक अपराधों में शामिल होने की बात कही और आरोप लगाया कि इस सौदे में 500 से 700 करोड़ रुपयों की दलाली दी गई.

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