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'क्वात्रोकी ने सारी रक़म निकाल ली थी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि इतालवी व्यवसायी ओत्तावियो क्वात्रोकी ने अपने खाते से सारा पैसा 16 जनवरी को ही निकाल लिया था. सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में दायर एक शपथपत्र में केंद्र सरकार ने ये सूचना दी है. सरकार की ओर से सूचना दी गई है कि इस मामले में लंदन भेजे गए अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल बी दत्ता भारत सरकार और सीबीआई दोनों का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने 16 जनवरी को ही एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और सीबीआई को नोटिस जारी करके कहा था कि वे सुनिश्चित करें कि बोफ़ोर्स दलाली मामले के अभियुक्त क्वात्रोकी अपने खाते से धन न निकाल सकें. उल्लेखनीय है कि सीबीआई की सहमति मिलने के बाद 11 जनवरी को क्वात्रोकी के खाते खोल दिए गए थे. क्वात्रोकी के दो खातों में कोई 21 करोड़ रुपए जमा थे और सीबीआई को आशंका थी कि ये धन बोफ़ोर्स तोप की ख़रीदी के लिए दलाली के रुप में दिया गया था. लेकिन सीबीआई इसके कोई सबूत नहीं जुटा पाई. मुख्य न्यायाधीश वाईके सभरवाल के अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय पीठ ने सरकार और सीबीआई को निर्देश दिए थे कि क्वात्रोकी के खाते से रक़म नहीं निकाले जाने की व्यवस्था करें. इसी पीठ को सीबीआई और केंद्र सरकार की ओर से सूचित किया गया कि क्वात्रोकी के खातों पर रोक अस्थाई रुप से लगाई गई थी. इसी मामले में दायर अजय अग्रवाल की एक और जनहित याचिका में जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें क्यों भरोसा नहीं होता सीबीआई पर?22 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्वात्रोकी ने कहा, मामला ख़त्म हो16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार-सीबीआई को यथास्थिति के निर्देश16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस सरकार को बचाने सामने आई सीबीआई16 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'क्वात्रोकी को कोई क्लीनचिट नहीं दी'15 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस क्वात्रोकी के ख़िलाफ़ सबूत नहीं: सरकार12 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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